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देसी दवाओं से हो रहा हाथियों का इलाज

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रामनगर (नैनीताल)। सांवल्दे के हाथी गांव में देसी दवाओं से हाथियों का इलाज किया जा रहा है। हाथियों के पैरों को इंफेक्शन से बचाने के लिए जड़ी-बूटियों के मिश्रण को हाथियों के पैरों पर लगाया जा रहा है।
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इमाम अख्तर बताते हैं कि वह हाथियों की देखभाल अपने बच्चों की तरह करते है। हाथी के पांवों में होने वाली लेमिनाटस बीमारी से बचाव के लिए रोजाना जड़ी-बूटियों से उनके पैर धोते हैं, जिससे पांवों को इंफेक्शन से बचाया जा सके। हाथी भी इमाम से बेहद प्यार करते हैं और उनकी हर बात को समझते हैं। बता दें कि दो साल पहले रामनगर वन प्रभाग के आमडंडा डिपो में रखी गई लक्ष्मी हथिनी के पैर में लेमिनाटस बीमारी हो गई, जिससे उसकी मौत हो गई थी।
हाथी गांव की स्थापना से चर्चा में आए इमाम
बिहार निवासी इमाम अख्तर वन्यजीव प्रेम के चलते चर्चा का विषय बने हुए हैं। हाथियों से लगाव के चलते उन्होंने अपनी जायदाद से बेटों को बेदखल कर दिया और पूरी संपत्ति हाथियों के नाम लिख दी। उसके बाद उन्होंने रामनगर के सांवल्दे में हाथी गांव बसाया है। ऐरावत संस्था के संचालक इमाम अख्तर ने बताया कि उनके पिताजी भी हाथी पाला करते थे। बचपन से इस जानवर के करीब रहते हुए उन्हें हाथियों से लगाव हो गया। कहा कि अगर हाथियों का संरक्षण नहीं किया गया तो हमारी अगली पीढ़ी इस विशाल जानवर को किताबों में ही पढ़ा करेगी।
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