हल्द्वानी। एसटीएच में हार्ट अटैक से लड़ते-लड़ते 77 वर्षीय बुजुर्ग ने दम तोड़ दिया। कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद परिजनों को शव दिया गया। बेटे ने आरोप लगाया कि सिस्टम की सख्ती के चलते पिता की जान चली गई। बेस अस्पताल में अगर एंटीजन रैपिड किट से कोरोना जांच कर लेते तो पिता का निजी अस्पताल में इलाज कराकर उनकी जान बचा सकते थे।
सतीश कालोनी निवासी आशीष ने बताया कि 77 वर्षीय पिता की मंगलवार को घर पर अचानक तबियत बिगड़ी। उनको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी सुबह नौ बजे एक निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए पहुंचे। निजी अस्पताल ने कोविड 19 की रिपोर्ट निगेटिव होने के बाद ही इलाज करने की बात कही और मरीज को बेस अस्पताल ले जाने को कहा। डाक्टरों को बताया गया कि पुराने पर्चे हैं और हम लोग कहीं बाहर नहीं गए। पिता की दवाएं लंबे समय से चल रही है और पूर्व में भी इनको ऐसी दिक्कत हो चुकी है। बताया कि बेस अस्पताल में मरीज को लेकर लगभग दस बजे पहुंचे। किसी ने उनका ईसीजी तक नहीं किया। सिर्फ दो इंजेक्शन दिए गए। बेस अस्पताल में ऐसे आईसीयू और एचडीयू बनाने का क्या फायदा जिसका लाभ ही नहीं मिला। बेस अस्पताल में पिता का एंटीजन रैपिड किट से कोरोना जांच नहीं की गई। अगर जांच हो जाती और रिपोर्ट निगेटिव होती तो निजी अस्पताल में पिता को इलाज मिल जाता। डाक्टर ने कागज तैयार कर एसटीएच रेफर कर दिया। बताया कि एसटीएच में डाक्टरों ने इमरजेंसी में मरीज को भर्ती कर लिया और हम लोगों को बाहर कर दिया। आज सुबह पांच बजे पिता की मृत्यु हो गई और दस बजे रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद शव हमको दिया गया।
आशीष का कहना है कि अगर ऐसी ही बदइंतजामी रही तो कोविड 19 से मरीज मरे या न मरे अगर अन्य बीमारियों से मर जाएंगे। प्रशासन को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और मानक ऐसे करने चाहिए ताकि निजी अस्पताल में इलाज कराकर कोई अपने घर वालों को बचा सके।
मगंलवार की दोपहर को बुजुर्ग मरीज बेस से रिफर होकर आए थे। उनका कोविड सैंपल जांच को भेजा गया था। उनको हार्ट अटैक हुआ था। आज सुबह पांच बजे उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई और दस बजे रिपोर्ट निगेटिव आई।
- डॉ. अरुण जोशी एमएस एसटीएच
- मामले मेरे संज्ञान में नहीं है। शुक्रवार को पूरे मामले की जानकारी लेकर जांच कराएंगे। जवाब तलब किया जाएगा कि एंटीजन रैपिड किट से जांच क्यों नहीं की।
- डॉ. हरीश लाल सीएमएस बेस अस्पताल