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अमर उजाला की ओर से लोहाघाट राजकीय पीजी कॉलेज में आयेजित श्री मुरारी लाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्? - फोटो : LOHAGHAT
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राजकीय पीजी कॉलेज में अमर उजाला की ओर से आयोजित मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति जिला स्तरीय वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने राष्ट्र हित में एक देश-एक चुनाव विषय पर असरदार तरीके से अपने तर्क रखे। प्रतियोगिता में जिले के विभिन्न महाविद्यालयों की सात टीमों के 14 प्रतिभागियों ने शिरकत की। हर टीम से एक प्रतिभागी ने पक्ष में और एक ने विपक्ष में विचार रखे।
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बुधवार को बीएड कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. एके द्विवेदी की अध्यक्षता और जन कवि डॉ. प्रकाश जोशी शूल के संचालन में हुए कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार गुरुरानी, विशिष्ट अतिथि काली कुमाऊं के वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र गहतोड़ी व डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के जिला महामंत्री मुकुल कुमार राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
लोहाघाट राजकीय पीजी कॉलेज के बीएड के छात्र रोहित जोशी ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव से न केवल नेताओं की जवाबदेही कम होगी बल्कि लोगों से दूरी भी बढ़ेगी। दूसरे नंबर पर चंपावत की अनुप्रिया राय, तीसरे नंबर पर चंपावत के हनुमंत ओली रहे। जबकि लोहाघाट पीजी कॉलेज की कविता जुकरिया और टनकपुर राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की निकिता जोशी को सांत्वना पुरस्कार मिला।
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विपक्ष में बोलते हुए रोहित ने कहा कि एक साथ चुनाव करने से बेशक खर्च बचेगा लेकिन लोकतंत्र में केवल व्यय बचाना ही महत्वपूर्ण नहीं है। सरकारें मूर्तियों में करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। फिजूल खर्ची में मोटी रकम बर्बाद करती हैं। ऐसे अपव्यय को बचाया जा सकता है। एक साथ चुनाव से क्षेत्रीय मुद्दे, क्षेत्रीय समस्याएं और क्षेत्रीय दलों को नुकसान होगा।
व्यक्तिवाद और बड़े नेताओं का दबदबा होने के साथ राष्ट्रीय दलों का वर्चस्व भी बढ़ेगा। प्रतियोगिता में लोहाघाट, चंपावत, देवीधुरा, टनकपुर के छात्र सौरभ कुमार, पवन ज्याला, शीला पांडेय, मनोज कुमार, शिवानी गुप्ता, रंजना जोशी, अनीता टम्टा, पूजा ढेक और कंचन भट्ट ने भी असरदार तर्क रखे। लोहाघाट राजकीय पीजी कॉलेज के डॉ. जगदीश जोशी, डॉ. स्वाति मेलकानी और डॉ.रुचिर जोशी ने निर्णायक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम में सहायक प्रोफेसर सुनील कुमार और रामधन नौटियाल भी मौजूद थे।
मुख्य अतिथि प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार बहुगुणा ने अमर उजाला द्वारा श्री मुरारी लाल माहेश्वरी वाद-विवाद प्रतियोगिता के जरिए छात्र-छात्राओं में रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए अमर उजाला का आभार जताते हुए आगे भी प्रतिभा संवर्द्धन के लिए कार्यक्रम करने की अपील की।
विजेताओं को मिली नकद इनाम
वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम रहे रोहित जोशी को पांच हजार रुपये, द्वितीय रहीं अनुप्रिया राय को तीन हजार, तृतीय रहे हनुमंत ओली को दो हजार रुपये की नगद राशि और प्रशस्ति पत्र और कविता जुकरिया और निकिता जोशी को सांत्वना पुरस्कार के रूप में एक हजार-एक हजार की राशि प्रदान की गई। शेष सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र दिया गया। मुख्य अतिथि पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुशील कुमार गुरुरानी, बीएड विभाग के अध्यक्ष डॉ. एके द्विवेदी और विशिष्ट अतिथि डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन के जिला मंत्री मुकुल कुमार राय ने विजेताओं को पुरस्कार दिया।
ये रहे विजेता:
1. प्रथम पुरस्कार : रोहित जोशी, राजकीय पीजी कॉलेज, लोहाघाट।
2.द्वितीय पुरस्कार : अनुप्रिया राय, राजकीय डिग्री कॉलेज, चंपावत।
3.तृतीय पुरस्कार: हनुमंत ओली, राजकीय पीजी कॉलेज, चंपावत।
4.सांत्वना पुरस्कार : 1.कविता जुकरिया, राजकीय पीजी कॉलेज, लोहाघाट।
5. सांत्वना पुरस्कार: निकिता जोशी, एपीजे अब्दुल कलाम राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, टनकपुर।
पुरस्कृत छात्रों के विचार
एक साथ चुनाव से गौण हो जाएंगे स्थानीय मुद्दे
एक देश-एक चुनाव न केवल भारत जैसे विशाल क्षेत्रफल और विशाल आबादी के लिए अव्यवहारिक है बल्कि संवैधानिक रूप से भी समस्या भरा है। लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ होने से स्थानीय मुद्दे गौण हो जाएंगे। सुरक्षा के नाम पर सड़क, सेहत, शिक्षा, गांव जैसे जमीनी मुद्दे गायब हो जाएंगे। प्रचार तंत्र से प्रभावित होकर लोगों के कार्यों की समीक्षा के बजाय शोर-शराबे के आधार पर वोट देने का खतरा ज्यादा रहेगा।
रोहित जोशी, लोहाघाट
एक चुनाव से विकास की निरंतरता पर नहीं पड़ेगी मार
एक देश-एक चुनाव का विचार देश हित में सर्वोत्तम विचार है। इससे अलग-अलग समय में चुनावों में होने वाले न केवल कई हजार करोड़ रुपये बचेंगे बल्कि इस रकम का उपयोग शिक्षा और स्वास्थ्य के रूप में भी किया जा सकेगा। बार-बार चुनाव के चलते लगने वाली आचार संहिता से विकास की निरंतरता पर मार पड़ती है। एक चुनाव होने से नेक और प्रगतिशील लोकतंत्र को विस्तार देने में मदद मिलेगी।
अनुप्रिया राय, चंपावत
परियोजनाओं में देरी से मिलेगी निजात
एक देश-एक चुनाव से लोकतंत्र को नई ताकत मिलेगी। इससे मतदाता को बार-बार मतदान के लिए जाने से तो मुक्ति मिलेगी ही, साथ ही हजारों करोड़ रुपये की बचत भी होगी। पहले लोकसभा चुनाव से 1967 तक वैसे भी एक साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के चुनाव होते रहे हैं। बार-बार चुनाव से विकास योजनाओं में होने वाली देरी से भी राहत मिल सकेगी।
हनुमंत ओली, चंपावत
विकासोन्मुखी है एक देश-एक चुनाव का विचार
एक देश-एक चुनाव से बार-बार होने वाले चुनाव से लोगों को निजात मिलेगी। मौजूदा व्यवस्था में पांच साल में औसतन आठ बार चुनाव होते हैं। एक देश-एक चुनाव विकासोन्मुखी विचार है। इससे आचार संहिता की मार से प्रभावित होने वाले विकास कार्यों के अलावा चुनावों पर होने वाले राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों के खर्चे पर भी लगाम लग सकेगी।
कविता जुकरिया, लोहाघाट
एक साथ चुनाव से गैर जवाबदेह व्यवस्था का खतरा
एक देश-एक चुनाव गैर जवाबदेही व्यवस्था को बढ़ाएगा। नेता और राजनीतिक दल वैसे भी लोगों से दूर रहते हैं। इस व्यवस्था से वे सियासतदां लोगों के सवालों से भागेंगे। प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव तक में हरिद्वार जिले के चुनाव प्रदेश के अन्य 12 जिलों के साथ नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा इस व्यवस्था को लागू करने में संवैधानिक, व्यावहारिक दुश्वारी भी आड़े आएगी।
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निकिता जोशी, टनकपुर
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