लोक निर्माण विभाग के विकास कार्यों पर ग्रहण लग गया है। शासन (प्रमुख अभियंता व विभागाध्यक्ष) का एक पत्र शनिवार को लोनिवि कार्यालय पहुंचा है। इसमें नया ही नहीं बल्कि मौजूदा काम न कराने का संकेत दिया गया है। पत्र में साफ कहा गया है कि अगर कोई काम होता है, तो काम और वित्तीय अधिभार दोनों के लिए संबंधित अफसर ही जिम्मेदार होंगे।
लोक निर्माण विभाग की आर्थिक सेहत पहले से ही नाजुक चल रही थी। सूत्रों के मुताबिक विकास कार्य कराने के लिए लोनिवि के पास चौ मास की राशि जारी ही नहीं हो सकी है। इससे पहले त्रैमास में जो राशि जारी हुई थी, वह भी नाकाफी थी।
विभाग को उम्मीद थी कि देर से ही सही, लेकिन राशि जारी हो जाएगी। पर उसकी जगह लोनिवि विभागाध्यक्ष एचके उप्रेती का पत्र मुख्य अभियंता समेत अन्य कार्यालयों को शनिवार को पहुंचा है।
सूत्रों के मुताबिक 17 फरवरी को जारी पत्र में कहा गया है कि कोई भी नया कार्य नहीं होना है। इसके अलावा जो कार्य स्वीकृत हो चुके हैं, इसके बाद उनका टेंडर जारी नहीं हुआ, तो टेंडर न किया जाए। यही नहीं अगर स्वीकृत कार्य को लेकर ठेकेदार और विभाग के बीच अनुबंध नहीं हुआ है, तो उस प्रक्रिया को भी रोकने को कहा गया है।
बताया जाता है कि इसमें जो भी कार्य चल रहा है, उसमें भी तेजी न लाने का संकेत दिया गया है। ऐसे में जो स्थिति है उसमें इस वित्तीय वर्ष में कोई भी काम हो पाएगा, उसके आसार कम ही हैं। अफसरों को भी उम्मीद है कि नई सरकार गठन के बाद ही कोई रास्ता निकलेगा। दूसरी तरफ जो भी काम चल रहे हैं, उनकी गति भी सुस्त हो गई है।