राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सीय शिक्षा को लेकर सरकार कितनी संजीदा है इसकी बानगी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में 50 सीटें बढ़ाई जानी है मगर इन सीटों को बढ़ाने से पहले 150 बेड का अस्पताल बनना है।
अस्पताल बन जाता है तो इसका लाभ क्षेत्र के युवाओं को डॉक्टर बनने के लिए मिलेगा साथ ही लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा भी मिलेगी। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही और विभागों के बीच आपसी समन्वय न होने के कारण अस्पताल अभी धरातल पर नहीं उतर पाया है।
केंद्र सरकार से बजट मिला पर नहीं बढ़े आगे
मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 100 सीटें हैं और 500 बेड का अस्पताल है। 50 सीटें एमबीबीएस की बढ़ाई जानी है। सीट बढ़ाने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार की सहमति है।
प्रस्ताव पर 60 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी है और केंद्र सरकार ने चार-पांच माह पहले 16 करोड़ रुपये जारी कर दिए थे। इसमें पांच करोड़ रुपये अवमुक्त करने के लिए राज्य सरकार ने अपने बजट में रखा है मगर धनराशि अभी तक जारी नहीं हो सकी है।
जमीन से जुड़ा मामला नहीं सुलझा
मेडिकल कॉलेज के टीबी एवं चेस्ट विभाग की जमीन रेशम विभाग की है। अब यह चिकित्सा-शिक्षा विभाग को हस्तांतरित हो गई है लेकिन ये हस्तांतरण सिर्फ कागजों तक सीमित है। वास्तविकता में अभी भी भूमि वन विभाग की है। इसी वजह से अस्पताल बनने की प्रक्रिया को झटका लग गया और जमीन से जुड़ा मामला सुलझ नहीं पाया है।
ये सुविधाएं बढ़ जाती
लेक्चर थियेटर
लैब का विस्तार
कैफेटेरिया
कॉमन हाल
परीक्षा हाल
ट्रामा सेंटर भी अधर में
एसटीएच में सात करोड़ 50 लाख की कीमत से ट्रामा सेंटर बनना था। इसमें 14 बेड का आईसीयू, 10 जनरल बेड, वेंटीलेटर, मानीटर समेत अन्य उपकरण खरीदे जाने थे। इसमें 90 प्रतिशत केंद्र सरकार और 10 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करना है।
केंद्र सरकार ने लगभग चार-पांच माह पहले छह करोड़ 75 लाख रुपये राज्य सरकार को जारी कर दिए थे। राज्य सरकार ने बजट में महज दो करोड़ का प्रावधान रखा है।
बर्न वार्ड भी अभी ठंडे बस्ते में
सुशीला तिवारी अस्पताल में बर्न वार्ड छह करोड़ 50 लाख रुपये की लागत से बनना है। इसमें भी केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत वहन करेगी। एक करोड़ 50 लाख रुपये उपकरण के लिए, एक करोड़ 50 लाख रुपये वार्ड, 10 बेड और संसाधनों पर खर्च होना है।
तीन वर्षों तक केंद्र सरकार लगभग तीन करोड़ रुपये उक्त राशि में से ही कर्मियों को वेतन के रूप में देगी। मई में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को साढ़े तीन करोड़ रुपये जारी कर दिया था। राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया था कि बर्न वार्ड के लिए धनराशि जल्द जारी की जाएगी।
कार्यदायी संस्थान बदलने के कारण ट्रामा सेंटर और 150 बेड का अस्पताल अटक गया है। 150 बेड के अस्पताल और बर्न वार्ड के लिए अभी धनराशि राज्य सरकार की ओर से नहीं मिली है। जबकि ट्रामा सेंटर के लिए दो करोड़ रुपये का प्रावधान बजट में रखा गया है। बजट की कोई कमी नहीं है पूरा प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है। तीन माह के भीतर तीनों प्रोजेक्टों पर कुछ न कुछ प्रगति जरूर दिखाई पड़ेगी। - डॉ. आशुतोष स्याना, निदेशक, चिकित्सा-शिक्षा
घट गए मरीज नहीं मिल रहा बजट
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में पूर्व एवं वर्तमान सरकार कुछ बेहतर तो कर नहीं पाई मगर राज्य स्थापना दिवस के दिन मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना बंद होने से मरीजों को एक और झटका जरूर लग गया। मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमाय योजना के तहत पूर्व में प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 120 से 125 मरीज अस्पताल पहुंचते थे।
सबसे अधिक मरीजों की संख्या देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल की होती थी। योजना बंद होने के बाद मरीजों की संख्या घटकर 90 से 100 रह गई है। प्रक्रिया की जटिलता के चलते अस्पताल भी बचने लगे हैं।
सूत्रों की मानें तो योजना बंद होने के बाद से डेढ़ माह में लगभग तीन से साढ़े तीन हजार मरीज उक्त योजना से इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे। अस्पतालों का लगभग एक करोड़ का बकाया है। जबकि कुल बकाया पांच करोड़ रुपये का है।
प्रभारी स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने बताया कि पुराने बकाए के लिए क्लेम शासन को भेजे जा रहे हैं और शीघ्र भुगतान हो जाएगा। योजना बंद होने के बाद से आए अभी तक के क्लेम का भुगतान जनवरी तक कर दिया जाएगा।