रामजी के बाण से जब रावण जमीन पर गिरता है तो पृथ्वी हिलने लगती है। समुद्र में तूफान आ जाता है। नदियां अपने मार्ग बदल देती है। बानरों, भालुओं और राक्षसों को दबाते हुए उसका धड़ पृथ्वी पर गिर जाता है। !!
प्राचीन श्री रामलीला मैदान में चल रही रामलीला में हजारों लोगों की मौजूदगी में भगवान श्रीराम ने अहंकारी रावण का अंत कर दिया। असत्य पर सत्य की जीत होते ही पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। चारों ओर श्रीराम की विजय के नारे लगने लगे। रामलीला मैदान में रावण का पुतला दहन देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ी।
रामलीला मैदान में आतिशीनजारों के बीच रावण के साठ फुट ऊंचे पुतले को आग के हवाले किया गया। मैदान को चारों ओर से एलईडी लाइटों से जगमगाया था। मैदान में इतनी भीड़ थी कि तिल रखने को जगह नहीं थी। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस प्रशासन ने पर्याप्त इंतजाम किए थे।
इस मौके पर मंत्री यशपाल आर्य, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक युद्धवीर, विधायक बंशीधर भगत, मेयर जोगेंद्र सिंह रौतेला, सिटी मजिस्ट्रेट पंकज उपाध्याय, मंडी समिति अध्यक्ष सुमित हृदयेश, एडीएम हरवीर सिंह, प्रदीप बिष्ट, विजय मनराल, संचालन समिति के मीडिया प्रभारी विनीत अग्रवाल, सुचित्रा जायसवाल, अतुल जायसवाल, रूपेंद्र नागर, तनुज गुप्ता, प्रदी जनौटी, हेमंत साहू, डीके गुप्ता, विनय कश्यप, हितेश पांडे, तरुण बंसल आदि मौजूद रहे।