भीमताल (नैनीताल)। भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील मलुवाताल क्षेत्र के ग्रामीणों ने विस्थापन के प्रस्ताव का विरोध किया। कहा कि उन्हें गांव का विकास चाहिए। इस कारण विस्थापन संबंधी सूचनाएं जुटाने मलुवाताल पहुंचे राजस्व विभाग के अधिकारियों को गांव से बैरंग लौटना पड़ा।
विकास खंड के मलुवाताल क्षेत्र की तलहटी में कलसा नदी बहती है। इससे मलुवाताल की पहाड़ी में भूकटाव, भूस्खलन हो रहा है। प्रभावित क्षेत्र से कई परिवार गांव में ही आसपास के क्षेत्रों में शिफ्ट हो चुके हैं। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश सरकार ने मलुवाताल क्षेत्र के लगभग 75 परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की योजना बनाई है।
इसीलिए बृहस्पतिवार को तहसीलदार कृष्ण कुमार, बीडीओ संतोष पंत, पट्टी पटवारी प्रमोद जोशी राजस्व कर्मियों के साथ विस्थापन संबंधी सूचनाएं जुटाने, भूकटाव देखने के लिए मलुवाताल पहुंचे। जैसे ही ग्रामीणों को राजस्व अधिकारियों के आने की सूचना हुई तो ग्रामीण एकजुट हो गए। उन्होंने तहसीलदार आदि अधिकारियों से भेंट कर अन्यत्र विस्थापित होने से मना कर दिया।
कहा कि वह अपनी पुस्तैनी जमीन छोड़कर नहीं जाएंगे। उन्हें विस्थापन नहीं बल्कि गांव में सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। सरकार बूढ़ाधूरा-मलुवाताल रोड का निर्माण कराए। तभी ग्रामीणों को यातायात सुविधा मिल सकेगी।
पिछले दिनों मलुवाताल क्षेत्र की एक गर्भवती महिला को चारपाई पर रखकर कई किमी पैदल चलने के बाद हल्द्वानी स्थित अस्पताल ले जाया गया था, जहां गर्भवती महिला ने मृत शिशु को जन्म दिया था। इससे पहले भी ग्रामीण विस्थापन के बजाए विकास की मांग को लेकर भीमताल में मौन जुलूस निकालकर विकास भवन में धरना दे चुके हैं।
पटवारी प्रमोद जोशी ने बताया कि ग्रामीणों ने लिखित में दिया है कि उन्हें विस्थापन नहीं चाहिए। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही रिपोर्ट जिला प्रशासन को उपलब्ध करा दी जाएगी। विस्थापन का विरोध करने वालों में ग्राम प्रधान मुन्नी देवी, पूर्व प्रधान लक्ष्मण सिंह गंगोला, रामपाल सिंह गंगोला, राजेंद्र सिंह, प्रताप सिंह, देव सिंह, पूरन सिंह, गंगा सिंह, मोहन चंद्र, दुर्गा देवी, दीपा देवी आदि थे।