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उत्तराखंड हाईकोर्ट: जिला पंचायत अध्यक्ष बोले- शिफ्टिंग अगर जरूरी ही है तो कुमाऊं से इस संस्था को ना हिलाया जाए

Wed, 22 May 2024 03:53 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल

सार

हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर जिला पंचायत अध्यक्षों उपाध्यक्षों का मत भी जुदा नहीं है। ये सभी लोग भी चाहते हैं कि कुमाऊं से हाईकोर्ट की शिफ्टिंग न हो। अधिकतर का कहना है कि हल्द्वानी के गौलापार में हाईकोर्ट शिफ्ट किया जाता है तो यह उपयुक्त होगा। 
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उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर जिला पंचायत अध्यक्षों उपाध्यक्षों का मत भी जुदा नहीं है। ये सभी लोग भी चाहते हैं कि कुमाऊं से हाईकोर्ट की शिफ्टिंग न हो। अधिकतर का कहना है कि हल्द्वानी के गौलापार में हाईकोर्ट शिफ्ट किया जाता है तो यह उपयुक्त होगा। सभी ने कहा कि सभी की जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पर निर्णय लिया जाना चाहिए। कई ने तो इसे कुमाऊं से शिफ्ट किए जाने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।

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हल्द्वानी के गौलापार में हाईकोर्ट के लिए उपयुक्त स्थान है। यह कुमाऊं और गढ़वाल का केंद्र है। यहां कनेक्टिविटी भी बेहतर है। दोनों मंडलों के लोग यहां आसानी से आवाजाही कर सकते हैं। सरकार को सभी की जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।
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- उमा बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष, अल्मोड़ा।

हाईकोर्ट को गढ़वाल शिफ्ट करना गलत है। यह कुमाऊं के हर व्यक्ति की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। कुमाऊं में ही हाईकोर्ट के लिए कई बेहतर स्थान हैं। हल्द्वानी के गौलापार में इसे स्थानांतरित किया जाना चाहिए। यदि इसे कुमाऊं से शिफ्ट किया तो आंदोलन होगा।
- कांता रावत, जिला पंचायत उपाध्यक्ष, अल्मोड़ा।

जब राज्य बना था तब पर्वतीय राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए देहरादून में राजधानी तो हाईकोर्ट नैनीताल में तय किया गया था। समय के साथ-साथ यदि हाईकोर्ट के लिए विस्तार की आवश्यकता है तो कुमाऊं में स्थान की कोई कमी नहीं है। हाईकोर्ट कुमाऊं में ही रहना चाहिए।
- कोमल मेहता, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पिथौरागढ़। 

वर्षों से लोग नैनीताल हाईकोर्ट में जाकर अपने काम करा रहे हैं। केस का सिलसिला हो या अन्य काम, राज्य के हर व्यक्ति के लिए हाईकोर्ट केंद्र बिंदु रहा है। अब इसे ऋषिकेश शिफ्ट कर बड़ी आबादी को सिर्फ परेशान होना पड़ेगा। इससे राज्य के कुमाऊं मंडल के लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
- ज्योति राय, जिप अध्यक्ष, चंपावत। 

हाईकोर्ट को शिफ्ट करना ठीक नहीं है। वर्तमान तक सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त चल रहीं थीं। अचानक नैनीताल हाईकोर्ट ऋषिकेश शिफ्ट करना अच्छी बात नहीं है। जनहित का ध्यान रखने की जरूरत है। अगर ऐसा होता है तो इस व्यवस्था के बदलाव से कई लोग प्रभावित होंगे।      
 - एलएम कुंवर, जिपं उपाध्यक्ष, चंपावत। 

हाईकोर्ट शिफ्टिंग का मामला जनहित से जुड़ा है। आचार संहिता खत्म होने के बाद जिला पंचायत की बोर्ड बैठक बुलाई जाएगी। इसमें यह मामला रखा जाएगा और सभी सदस्यों से राय ली जाएगी। इस राय के आधार पर प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इस संबंध में उनकी बोर्ड से अलग राय नहीं है।
-रेनू गंगवार, जिला पंचायत अध्यक्ष ऊधमसिंह नगर 

हल्द्वानी स्पोर्ट्स एसोसिएशन भी हाईकोर्ट शिफ्टिंग के विरोध में
हल्द्वानी स्पोर्ट्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने बैठक कर हाईकोर्ट को कुमाऊं से बाहर शिफ्ट करने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस प्रकरण में हस्तक्षेप कर कोर्ट को नैनीताल से बाहर जाने से रोके।

संस्था के अध्यक्ष नवीन चंद्र वर्मा ने कहा कि राज्य गठन के समय सभी पक्षों की राय के बाद सरकार ने देहरादून में राजधानी तो कुमाऊं के नैनीताल में हाईकोर्ट स्थापित किया। उन्होंने हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्ट करने का विरोध किया। कार्यकारी अध्यक्ष मोहन सिंह बोरा ने हाईकोर्ट शिफ्टिंग के मुद्दे से दोनों मंडलों के बीच तकरार की स्थिति पैदा हो रही है। ऐसे में मामले में सरकार को हस्तक्षेप कर कोर्ट को शिफ्ट होने से रोकना चाहिए।महासचिव गोपाल बेलवाल ने कहा कि यदि हाईकोर्ट को कुमाऊं से बाहर शिफ्ट कर दिया गया तो इससे कुमाऊं और गढ़वाल के विकास के मापदंडों में भारी अंतर आ जाएगा। वक्ताओं ने एक स्वर से कोर्ट को कुमाऊं से बाहर शिफ्ट करने के फैसले को गलत बताया। 
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हाईकोर्ट हल्द्वानी के गौलापार में पूर्व में चयनित जमीन में बनाना उचित रहेगा। हल्द्वानी रेल मार्ग से जुड़ा है। पंतनगर हवाई अड्डा भी नजदीक है। हाईकोर्ट की अन्यत्र अलग बेंच नहीं बननी चाहिए।  
- नवीन परिहार जिला पंचायत उपाध्यक्ष बागेश्वर

राज्य गठन के समय ही देहरादून में अस्थायी राजधानी और नैनीताल में हाईकोर्ट की स्थापना की गई थी। हाईकोर्ट को यदि नैनीताल से दूसरे स्थान पर शिफ्ट किया जाना है तो कुमाऊं में पर्याप्त स्थान है। इस तरह के मामलों में जनभावनाओं का ध्यान भी रखा जाना चाहिए।
- दीपिका बोहरा, जिपं अध्यक्ष पिथौरागढ़। 
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