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आपदा राहत घृणित घोटालों की सीबीआई जांच हो

Tue, 02 Jun 2015 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
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नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने आधा दर्जन से अधिक विधायकों के साथ सोमवार को राजभवन में राज्यपाल डा. केके पॉल से मुलाकात की। उन्होंने आपदा राहत कार्य में हुए घोटाले को घृणित घोटाला की संज्ञा देते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की।
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केदारनाथ समेत प्रदेश के विभिन्न स्थानों में आई आपदा में भारी जानमाल का नुकसान हुआ। देश भर की प्रदेश सरकारों, संस्थाओं और लोगों ने मदद को हाथ बढ़ाया, लेकिन राहत एवं बचाव में लगे अधिकारी लजीज व्यंजनों का स्वाद लेते हुए महंगे होटल में रात गुजार रहे थे। विभागीय बिल इसे प्रमाणित भी कर रहे हैं।

भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कहा है कि 17 मार्च 2015 को बजट चर्चा में उन्होंने यह मामला उठाया था। करोड़ों रुपये की लूट और अपात्र को मुआवजा बांटने की बात भी कही थी। सरकार ने वसूली के आदेश देकर इसके प्रति जिम्मेदार लोगों को माफ कर दिया। उन्होंने सूचना आयोग की ओर से सीबीआई जांच की संस्तुति को उचित ठहराते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
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इस दौरान विधायक यतीश्वर आनंद, आदेश चौहान, मदन कौशिक, राजकुमार ठुकराल, बंशीधर भगत, पुष्कर सिंह धामी, प्रेम सिंह राणा, दान सिंह भंडारी समेत हेमंत द्विवेदी, दीवान बिष्ट, देवेंद्र ढैला, विवेक साह, हेम आर्या, गोपाल रावत, मनोज जोशी आदि थे।
इनसेट
ये हैं चौंकाने वाले तथ्य
- रुद्रप्रयाग में बचाव में लगे कार्मिकों के खाने पर 25 लाख 19 हजार रुपये खर्च।
- एक अधिकारी के होटल में ठहरने का खर्च 6750 रुपये
- पिथौरागढ़ जिले के जल संस्थान का कार्य 28 दिसंबर 2013 को शुरू हुआ, जबकि बिल कार्य पूर्ण होने के 43 दिन पूर्व दे दिया गया। इसी प्रकार एक अन्य बिल छह माह पूर्व का है।
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- नगर पंचायत डीडीहाट के 30.45 लाख रुपये के कार्यों के कोई बिल ही नहीं हैं।
- तहसीलदार कपकोट ने 12 लाख रुपये पीड़ितों को बांटना दिखाया, जबकि रसीद मात्र पांच हजार रुपये की।
- तहसीलदार गरुड़ ने 1.83 लाख बांटे, जबकि रसीद 1996 रुपये की।
- उत्तरकाशी के खाने के लाखों रुपये के बिल आपदा के दिन 16 जून को ही लगा दिए गए।
- मोटर साइकिल में 30, 25, 15, 30 लीटर डीजल डालना दिखाया है, जबकि एक मोटर साइकिल में अधिकतम 14 लीटर तेल आता है, वो भी पेट्रोल।
- पर्वतीय क्षेत्रों में थ्री-व्हीलर के बिल हैं, जो क्षेत्र में चलते ही नहीं।
- एसडीएम के नाम पर बिना नंबरों के वाहनों में 21 जून से 9 जुलाई तक 51795, 49329, 21733 रुपये का डीजल खर्च दिखाया गया है।
- कर्णप्रयाग में आपदा से डेढ़ माह पहले ईंधन के बिल लगा दिए गए।
- चमोली जिले के जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी ने आपदा से एक माह पूर्व होटल बिल लगा दिए।
- डेक्कन हैलीकाप्टर का 24 जून को जमा किए बिल में चार दिन के ईंधन का खर्च 98.8 लाख रुपये दर्शाया गया है।
- आपदा से कम प्रभावित पिथौरागढ़ और बागेश्वर में केएमवीएन ने 15 दिन में आपदा प्रभावितों के ठहरने पर 4 लाख रुपये का बिल दर्शाया है।
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