हल्द्वानी। उच्चशिक्षा निदेशालय का देहरादून स्थित कैंप आफिस बंद होने के बाद भी तीन अधिकारी राजधानी का मोह नहीं छोड़ पाए हैं। चार में से तीन सहायक निदेशक देहरादून में ही बैठ रहे हैं। निदेशालय ने कार्य प्रभावित न हो इसके लिए महाविद्यालयों से एसोसिएट प्रोफेसरों को अटैच किया हुआ है।
उच्चशिक्षा निदेशालय कार्यालय पहले यहां राजकीय महिला महाविद्यालय के परिसर में संचालित होता था तथा निदेशालय का कैंप आफिस देहरादून में चलता था। पिछली कांग्रेस सरकार में उच्चशिक्षा मंत्री का प्रभार मिलने के उपरांत डा. इंदिरा हृदयेश ने हल्द्वानी में ही गौलापार में चयनित भूमि पर उच्चशिक्षा निदेशालय भवन का निर्माण कराया।
साथ ही देहरादून में चल रहे कैंप ऑफिस को तत्काल प्रभाव से बंद करवा दिया। निदेशालय का अपना भवन बनने के बाद भी दफ्तर महिला महाविद्यालय से कुछ कर्मचारी गौलापार शिफ्ट करने को तैयार नहीं थे। बाद में डा. इंदिरा हृदयेश की चेतावनी पर कार्यालय गौलापार शिफ्ट हुआ।
देहरादून का कैंप ऑफिस बंद होने पर कुछ दिन तो वहां तैनात अधिकारी-कर्मचारी यहां बैठे। इसके बाद ये फिर देहरादून में बैठने के उपाय खोजने में जुट गए। निदेशालय में सहायक निदेशक के पदों पर डा. सतपाल सिंह साहनी, डा. बीएन शर्मा, डा. अनुराग अग्रवाल और डा. शिव नारायण सिंह तैनात हैं।
इनमें से तीन सहायक निदेशक देहरादून में ही बैठते हैं। बताते हैं कि तीन सहायक निदेशकों ने देहरादून में अपना दफ्तर बनाया हुआ है। किराये के भवन में दफ्तर चल रहा है। इसमें रूसा के प्रभारी डा. सतपाल सिंह साहनी, विधि का कार्य देखने की वजह से डा. बीएन शर्मा और रूसा योजना में ही ई लर्निंग के प्रभारी बतौर डा. शिवनारायण सिंह तैनात हैं।
हल्द्वानी में एक सहायक निदेशक डा. एके अग्रवाल बैठते हैं। कार्यालय का कामकाज सुचारु रखने के लिए बाजपुर से एसोसिएट प्रोफेसर डा. एके जोशी और एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी से एसोसिएट प्रोफेसर डा. एमसी पांडेय को निदेशालय से अटैच किया हुआ है।
उच्चशिक्षा निदेशक डा. बीसी मेलकान बताते हैं कि शासन स्तर निदेशालय की ओर से समन्वय स्थापित करने के लिए देहरादून में रूसा का दफ्तर खोला गया है। इस योजना को लेकर समय - समय पर शासन में बैठके होती रहती हैं। कोर्ट के मामलों में पैरवी करने में कोई व्यवधान न हो, इसके लिए विधि प्रभारी का बैठना भी देहरादून में जरूरी है।