नगर निगम में मेयर और मुख्य नगर अधिकारी की अनबन के बाद अब पार्षद भी खेमों में बंट गए हैं। नेतागिरी होने से नगर निगम क्षेत्र में विकास कार्य तो दूर सफाई व्यवस्था भी लड़खड़ा गई है। पार्षद जनता का सामना करने से कतराने लगे हैं।
वार्डों में विकास कार्य करवाए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को कांग्रेस समर्थित पार्षदों का प्रतिनिधिमंडल वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से मिला। पार्षदों ने कहा कि यही हाल रहा तो वोट मांगने के लिए जनता के सामने नहीं जा पाएंगे। नगर निगम से पहले विधानसभा के चुनाव होने हैं।
नगर निगम के ढांचे का पुनर्गठन नहीं हो सका है। परिसीमन लटका है। मैन पावर की जबर्दस्त कमी है। निगम की आमदनी के सीमित संसाधन हैं, जबकि खर्चे कहीं अधिक हैं। कर्मचारी तीन-तीन महीनों तक वेतन का इंतजार करते हैं। विकास कार्यों के लिए बजट नहीं है।
निगम सिर्फ राजनीति का अखाड़ा बना है। मुख्य नगर अधिकारी आरडी पालीवाल और मेयर डा. जोगेंद्र सिंह रातैला के ‘सुर-ताल’ एक नहीं होने से पार्षद भी कांग्रेस और भाजपा के खेमों में बंटे हैं। इससे निगम के कर्मचारी भी बेलगाम हैं। वार्डों की सफाई व्यवस्था चौपट है। अधिकारी तो दूर कर्मचारी तक पार्षदों की सुनने को तैयार नहीं हैं।
निगम में खुद की उपेक्षा और वार्डों में विकास कार्य नहीं होने से आहत कांग्रेस समर्थित पार्षद शुक्रवार को वित्तमंत्री डा. इंदिरा हृदयेश से मिले। पार्षदों ने कहा कि वार्डों के छोटे-छोटे काम लटके हैं। निगम के पास इनके लिए बजट नहीं है। जनता वोट का हिसाब मांगने लगी है।
पार्षदों ने कहा कि जनता के काम नहीं हुए तो वो पार्टी को वोट देना छोड़ देगी। पार्षदों का दर्द सुनने के बाद वित्तमंत्री ने आश्वासन दिया कि वार्डों में विधायक निधि से विकास कार्य कराए जाएंगे।
प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों की सूची उन्हें उपलब्ध कराएं। इस दौरान नरेंद्रजीत सिंह रोडू, मोहन बिष्ट, राजू नेगी, मो गुफरान, लइक कुरैशी, मुन्ना पोखरिया मौजूद थे।