कोटाबाग। आयुर्वेदिक हॉस्पिटल को रानीकोटा शिप्ट करने के विरोध में विभाग और ग्रामीण आमने-सामने हैं। ग्रामीणों ने रविवार को अस्पताल के बाहर धरना देते हुए कहा कि अस्पताल शिफ्ट नहीं होने दिया जाएगा। विभाग का कहना है कि उच्चीकरण के बाद अस्पताल शिफ्ट किया जा रहा है।
कुछ दिन पूर्व अस्पताल में तैनात नवनियुक्त महिला डॉक्टर ने अस्पताल का कुछ सामान रानीकोटा के प्राइमरी स्कूल में शिफ्ट कर दिया। गांव के लोगों ने सामान न ले जाने के लिए अस्पताल गेट पर अपना ताला लगा दिया। प्रधान गोपाल सिंह कपकोटी ने कहा कि अस्पताल शिफ्ट हुआ तो आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। इधर आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. प्रदीप मेहरा का कहना है कि 2 साल पहले अस्पताल का उच्चीकरण हो गया है। सरकारी आदेश के अनुसार हॉस्पिटल को किराए की बिल्डिंग से हटाकर सरकारी बिल्डिंग में स्थापित करना है। इसके लिए शिक्षा विभाग से परमिशन भी ले ली गई है। जवाब में बधानी के पूर्व प्रधान कमला बधानी का कहना है कि उनके कार्यकाल में अस्पताल की नींव रखी गई थी। तब डोला न्याय पंचायत में रानीकोटा नहीं था, आज भी नहीं है। अस्पताल से डोला न्याय पंचायत के 8 गांव के लोगों को लाभ मिल रहा है। लिहाजा इसे शिफ्ट नहीं होने दिया जाएगा।