उडा द्वारा प्रस्तावित टाउनशिप को मंजूरी दिए जाने से नैनीताल में भूस्खलन के लिहाज से अति संवेदनशील क्षेत्र जोन-1 और जोन-2 में रह रहे सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित आवास मिल सकेंगे।
वहीं, जनसंख्या का दबाव भी कम होगा। प्रस्तावित टाउनशिप के अस्तित्व में आने से भविष्य में अन्य स्थानों पर भी नई टाउनशिप विकसित होने के रास्ते खुल जाएंगे। हालांकि जोन-1 और जोन-2 में रह रहे कितने परिवारों को नई टाउनशिप में शिफ्ट किया जाएगा, यह सीमांकन के बाद ही तय होगा।
बता दें कि नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र के ऊपरी हिस्से को सात नंबर के रूप में पहचाना जाता है। यह वही क्षेत्र है, जहां वर्ष 1880 में जबरदस्त भूस्खलन हुआ था और कई लोगों को जान गंवानी पड़ी थी।
पिछले दो-तीन दशकों में इस क्षेत्र में वैध-अवैध रूप से बेतरतीब निर्माण कार्य हुए। इसके चलते उक्त क्षेत्र के पहाड़ लगातार कमजोर होते चले गए। नतीजा यह रहा कि यह पूरा क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी में शामिल हो गया।
बीते वर्षों के दौरान भी इस क्षेत्र की पहाड़ी दरकती रही, जिसके चलते संवेदनशील क्षेत्र में रह रहे लोगों के विस्थापन की मांग उठी।
एलडीए के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व में हुए सर्वे में स्टाफ हाउस, चार्टन लाज, पापुलर कंपाउंड, माडर्न काटेज व मार्शल कॉटेज के क्षेत्रों को पुनर्वास के लिए चुना गया था। अब जोन-1 और जोन-2 का नए सिरे से सीमांकन होना है। सीमांकन के बाद ही सही जगहों और मकानों की संख्या का पता चल पाएगा।