नैनीताल। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की अदालत ने मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दिलाने के बदले रुपये लेने के समझौते को गैरकानूनी करार दिया है। उन्होंने कहा कि मृतक आश्रित नियुक्ति परिवार के आश्रितों की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए मानवीय आधार पर दी जाने वाली सुविधा है। ऐसे में अनापत्ति प्रमाणपत्र देने के बदले धन लेना या उसका समझौता करना कतई मान्य नहीं है। अदालत इसी आधार पर चेक बाउंस मामले में निचली अदालत की ओर से सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए महिला को दोषमुक्त करार दिया।
प्रकरण के मुताबिक बागेश्वर निवासी बहादुर सिंह बिष्ट लोक निर्माण विभाग में कार्यरत थे। उनके निधन के बाद मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के लिए ममता बिष्ट और उनके भाई भीमताल निवासी अजय बिष्ट पात्र थे। प्रपत्रों में अजय बिष्ट ने ममता बिष्ट की नियुक्ति के लिए सहमति दी। दोनों के बीच इस बात पर समझौता हुआ कि नौकरी मिलने के बाद ममता अगले 15 वर्षों तक हर महीने 10 हजार रुपये भाई को देंगी। भुगतान को लेकर विवाद होने पर ममता बिष्ट की ओर से दिया गया छह लाख रुपये का चेक बाउंस हो गया।
मामले में दायर परिवाद में नैनीताल की निचली अदालत ने नौ दिसंबर 2025 को ममता बिष्ट को दोषी ठहराते हुए तीन माह के कारावास और 6.20 लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए ममता ने अपील दायर की थी। अदालत ने कहा कि एनओसी के बदले धन लेने का समझौता अवैध है इसलिए समझौते के आधार पर जारी किया गया चेक वैध नहीं ठहराया जा सकता है। अदालत ने आरोपी ममता को आरोपों से बरी कर दिया। आदेश दिया कि अपील के दौरान जमा कराई गई 1.19 लाख रुपये की राशि अजय बिष्ट को 60 दिनों के भीतर ब्याज लौटाएं।