हल्द्वानी। डेयरी विकास निदेशालय का अब जल्द ही अपना भवन होगा। इसके लिए शासन ने तीनपानी स्थित 1.75 हेक्टेयर वन भूमि डेयरी विकास निदेशालय को हस्तांतरित कर दी है। इसके साथ ही विभाग ने भी निदेशालय भवन निर्माण कराने की तैयारी तेज कर दी है। भवन निर्माण पर करीब दस करोड़ की लागत आएगी। इसकी डीपीआर शासन को भेजी हुई है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद शासन ने आनन - फानन में मंगलपड़ाव स्थित लालकुआं दुग्ध संघ के खस्ताहाल भवन में ही डेयरी निदेशालय का दफ्तर खोल दिया था। तब से इसी तरह निदेशालय का कार्यालय चल रहा है। डेयरी निदेशालय के दफ्तर आने वाले लोगों के साथ ही अधिकारी - कर्मचारियों को दफ्तर के बाहर देसी शराब की दुकान होने के कारण परेशानी होती है।
दफ्तर के गेट के सामने तक कई बार शराबी पड़े मिलते हैं। इस समस्या को दूर करने एवं डेयरी निदेशालय का भवन निर्माण कराने के लिए लालकुआं से विधायक एवं दुग्धमंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल ने वन भूमि हस्तांतरण के लिए प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए थे।
इस पर डेयरी विभाग ने तीनपानी स्थित उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पास 1.75 हेक्टेयर वन भूमि दिलाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। प्रस्ताव पर वन मंत्रालय की ओर से कई आपत्तियां भी लगाई गई तथा डेयरी विभाग द्वारा आपत्तियों का निस्तारण किए जाने के बाद वन मंत्रालय ने 1.75 हेक्टेयर वनभूमि हस्तांतरित कर दी।
डेयरी निदेशक ललित मोहन रयाल ने बताया कि विभाग को हस्तांतरित वनभूमि पर 93 पेड़ लगे हुए हैं जिन्हें काटने की कार्यवाही वन निगम को करनी है। इसके उपरांत निदेशालय भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण निगम ने निदेशालय भवन निर्माण के लिए करीब दस करोड़ की डीपीआर बनाकर भेजी है, जिसकी स्वीकृति जल्द होने की उम्मीद है।
निदेशक ने बताया कि वनभूमि के बदले धारी तहसील क्षेत्र में ककोड़ में भूमि वन विभाग को उपलब्ध कराई गई है। उपनिदेशक संजय उपाध्याय ने बताया कि वन विभाग को एनपीवी एवं क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए 20 लाख की राशि प्रदान की गई है।