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कालागढ़ से लापता हुआ श्रमिक गणेश दो माह बाद मिला

Mon, 18 May 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामनगर
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दो माह पूर्व कार्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ से लापता हुए श्रमिक गणेश पुत्र स्व. मुषराम को बैलपड़ाव पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान बरामद कर लिया है। रविवार को सीटीआर कर्मियों, कालागढ़ पुलिस और परिजनों को चौकी में बुलाकर उसकी पहचान कराने के बाद कालागढ़ पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
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शनिवार देर रात बैलपड़ाव पुलिस ने रात्रि गश्त के दौरान देर रात तीन बजे बैलपड़ाव में संदिग्ध अवस्था में एक युवक को घूमते हुए देखा। टीम ने पूछताछ की तो उसने अपना नाम गणेश निवासी ढेला बताया। इसकी सूचना पुलिसकर्मियों ने चौकी इंचार्ज जसविंदर सिंह को दी। चौकी इंचार्ज ने चौकी में उससे गहन पूछताछ की तो पता चला कि यह लापता गणेश ही है। उन्होंने पहचान के लिए गांव के पूर्व प्रधान गणेश नेगी, गणेश की मां देवकी देवी, बिजरानी रेंज के रेंजर महेश बिष्ट, एसओजी प्रभारी निर्मल पांडे और कालागढ़ की पुलिस को बुलाया।

पूछताछ में गणेश ने बताया कि जिंदगी से परेशान होने के कारण वह यहां से हरिद्वार चला गया और हरकी पैड़ी में रह रहा था। बीच में घर लौटना चाहा, लेकिन डर रहा था। शनिवार को हरिद्वार से हल्द्वानी जाने वाले ट्रक में बैठ गया और उसे नींद आ गई। जब आंख खुली तो वह बैलपड़ाव पहुंच चुका था और देर रात वह यहीं उतर गया। इधर, चौकी पहुंची गणेश की मां बेटे को सही सलामत देखकर बार-बार खुशी में रोए जा रही थी और बेटे के गले से लिपट जा रही थी। गणेश की पत्नी विद्या देवी भी पति के सलामत घर वापसी से बेहद खुश है। उसके दो बच्चे दिव्यांश (8) और अतुल उर्फ पप्पू (4) हैं।
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क्या था गणेश का मामला
12 मार्च 2015 को सीटीआर में बतौर दैनिक श्रमिक कार्यरत ढेला निवासी गणेश लाल रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गया था। गणेश के कपड़े, मोबाइल, पर्स कालागढ़ सिडोल डाम से बरामद हुए थे। आशंका जताई जा रही थी कि वह मगरमच्छ का शिकार हो गया होगा। हालांकि वनकर्मी होकर मगरमच्छ का शिकार होने वाली बात किसी के गले नहीं उतर रही थी। इस बात को लेकर वन विभाग के एसडीएम खुशाल सिंह रावत पर भी उंगलियां उठी थीं। इसके बाद बैकफुट पर आए वन विभाग ने गणेश की तलाश में जंगल का चप्पा-चप्पा छान मारा, लेकिन गणेश का पता नहीं चल सका था। 14 मार्च को गणेश के बरामदगी के लिए ढेला वन चौकी में जोरदार धरने-प्रदर्शन हुए। आंदोलनों के बाद वन विभाग ने गणेश के परिजनों को वन्य जीव संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्थाओं के माध्यम से आर्थिक मदद भी मुहैया कराई थी। वहीं आंदोलनकारियों ने गणेश की खोजबीन के लिए सीबीसीआईडी जांच तक की मांग की थी।
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