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15 दिन से शिकार और सुरक्षा की ले रहे थे टोह

Thu, 16 Apr 2015 02:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
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रनसाली रेंज में पकड़े गए पांच शिकारियों के बारे में वन विभाग और केंद्र के वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को अहम जानकारी मिली है। यह शिकारी 15 दिनों से आसान शिकार और वन विभाग के सुरक्षा प्रबंधों की टोह ले रहे थे। पूछताछ में पता चला है कि उत्तराखंड में बाहर से आने वाले बावरियों को सभी तरह की सुविधा, संसाधन आदि देने का जिम्मा रुद्रपुर का बाबू मियां संभालाता था। इससे और किन शिकारियों की मदद की है, उसकी जानकारी जुटाई गई है।
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आपरेशन चलाने वाले डीएफओ डा. पराग मधुकर धकाते कहते हैं कि रुद्रपुर का रहने वाला बाबू मियां एक तरह से शिकारियों का स्लीपर सेल था। यह बाहर से आने वाले बावरियों को ठहरने, बाघ को मारने के लिए कड़के, फंदे, हथियार से लेकर रुपया आदि देता था। इसके अलावा वह पुलिस, वन महकमे के अफसरों के मूवमेंट तक पर नजर रखते हुए उनकी खबर शिकारियों तक पहुंचाता था। यही नहीं 2008 में कार्बेट पार्क के पास एक शिकारी दरिया हत्थे चढ़ा था, इसकी जमानत भी बाबू मियां ने ली थी।

पकड़े गए मंगत राम के संबंध भी कुख्यात तस्कर तोतराम से है। तोताराम उसकी रिश्तेदारी में आता है। तोताराम ने 2010 में हल्द्वानी वन प्रभाग के अधीन टनकपुर में एक बाघ का शिकार किया था। पकड़े गए शिकारियों के निशाने पर नंधौर अभ्यारण्य, कार्बेट पार्क से लेकर तराई पूर्वी वन प्रभाग के सुरई रेंज, यूपी का पीलीभीत रेंज था, जहां पर बाघ रिपोर्ट हैं।
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जेल भेजे गए शिकारी
डीएफओ के अनुसार पकड़े गए शिकारियों को हल्द्वानी के एसीजीएम कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उनको जेल भेज दिया गया है।
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