केंद्रीय खुफिया विभाग ने देश के अन्य भागों की तरह प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर आतंकियों के मददगारों (स्लीपिंग मॉड्यूल्स) की सूची मांगी है। डीआईजी ने इस मामले में कुमाऊं रेंज के सभी छह जिलों के थानाध्यक्षों को पत्र भेजकर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि कुमाऊं में ऐसे संदिग्ध सामने नहीं आए हैं। फिर भी एलआईयू के साथ पुलिस भी संदिग्धों की छानबीन करने में जुट गई है।
मेरठ में आईएसआई एजेंट इजाज की गिरफ्तारी के बाद खुफिया विभाग को लगने लगा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले काफी संवेदनशील है। इनका नेटवर्क उत्तराखंड में भी हो सकता है जबकि पुलिस अधिकारी इससे इनकार कर रहे हैं। फिर भी आईबी ने देश के अन्य प्रदेशों की तरह उत्तराखंड के आला अधिकारियों को पत्र भेजकर आतंकियों को फंडिंग करने वाले या किसी प्रकार से मदद पहुंचाने वाले संदिग्धों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
बताया गया है कि पहले भी प्रकाश में आए संदिग्ध लोगों की जांच कर सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में उनकी सक्रियता की जांच की जाएगी। सूची तैयार करने वाली पुलिस टीमें इस तथ्य की जांच करेंगी कि कौन नव धनाढ्य बना है।
धनाढ्य बनने के पीछे कारण क्या हो सकते हैं, क्योंकि ऐसे तथ्य सरकारी या गैर सरकारी हो सकते हैं। इस मामले में डीआईजी पीएस सैलाल ने सभी थानों को पत्र भेजकर पुलिस के साथ एलआईयू को सक्रिय कर दिया है। आईबी की टीमें अपने ढंग से कुमाऊं मंडल में छानबीन करने में जुटी हैं लेकिन अभी तक आतंकियों का नेटवर्क नहीं मिला है।