पारिवारिक विवाद में उलझे पति ने हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र के परिसर में ही नींद की गोलियां खाकर जान देने की कोशिश की। उसकी जेब से सुसाइड नोट भी मिला। आनन-फानन में उसे हाईकोर्ट की एंबुलेंस से बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मामले के अनुसार लखनऊ निवासी आशीष आर्या और हल्द्वानी निवासी उसकी पत्नी रितु आर्या के बीच भरण पोषण के मामले में विवाद चल रहा है। निचली अदालत ने आशीष आर्या को दस हजार रुपये भरण पोषण भत्ता देने का निर्देश दिया था।
आशीष का कहना था कि उसकी स्थिति ऐसी नहीं है कि इतना भरण पोषण भत्ता दे पाए। इसी निर्देश के खिलाफ आशीष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस मामले में दोनों को समझौते के लिए हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र भेजा गया था।
मध्यस्थता केंद्र में दोपहर बाद बातचीत के दौरान आशीष ने कहा कि उसे दवाई खानी है। उसके बाद कोर्ट परिसर में ही उसने नींद की गोलियां खा लीं। आशीष को हाईकोर्ट की एंबुलेंस से बीडी पांडे अस्पताल पहुंचाया गया।
इलाज से किया इनकार, बेटी से मिलाओ
हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में सुनवाई के दौरान लखनऊ निवासी आशीष आर्या (37) की नींद की गोलियां खाने से हालत बिगड़ गयी। उन्हें एंबुलेंस से बीडी पांडे जिला अस्पताल में लाया गया। अस्पताल में आशीष ने उपचार करवाने से मना कर दिया।
अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा.तारा आर्या व इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक डा. अनिरुद्ध गंगोला ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने डॉक्टरोें की बात नहीं मानी। सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी बीएस भाकुनी भी पुलिस बल के साथ अस्पताल में पहुंचे।
पुलिस और डॉक्टरों ने उन्हें करीब आधे घंटे तक समझाया। आशीष का आरोप था कि ससुराली उसे बेटी से नहीं मिलने देते हैं। आशीष ने कहा कि उसे एक बार बेटी से मिलवा दें। पुलिस ने उसे भरोसा दिलाया कि उसके स्वस्थ होने के बाद बेटी से उसे जरूर मिलाएंगे।
जिसके बाद वह उपचार के लिए तैयार हो गया। डा.गंगोला ने बताया कि आशीष के स्वास्थ्य में सुधार है। बताया जाता है कि आशीष लखनऊ के सैनिक स्कूल में शिक्षक हैं।