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आटोमोबाइल की दुकान में चल रहा था अवैध रीफलिंग का खेल

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हल्द्वानी। पुलिस और प्रशासन की सुस्ती के चलते रसोई गैस की कालाबाजारी करने वालों के हौसले बुलंद हैं। जिला पूर्ति निरीक्षक पर हमले के बाद भी न तो पुलिस ने सबक लिया न ही प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हुए। गैस की कालाबाजारी बेरोकटोक जारी है। अब शनिबाजार के पास ऑटोमोबाइल की दुकान में गैस रीफिलिंग का खेल पकड़ा गया है। पुलिस ने आपूर्ति विभाग के साथ छापा मारकर तो 27 गैस सिलेंडर, दो इलेक्ट्रानिक्स कांटा और फुट पंप बरामद किए गए। पुलिस एक ही युवक को गिरफ्तार कर पाई। हालांकि पुलिस उससे अब तक ज्यादा खुलासा नहीं कर पाई है जिससे कि कालाबाजारी करने वालों तक पहुंचा जा सके।
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बनभूलपुरा थानाध्यक्ष दिनेश नाथ महंत को सूचना मिली कि शनि बाजार रेलवे फाटक पर एक ऑटोमोबाइल दुकान में गैस रीफिलिंग हो रही है। पुलिस ने आपूर्ति विभाग को सूचना देने के बाद दुकान में छापा मारा। पुलिस टीम ने दुकान से 27 गैस सिलेंडर, दो इलेक्ट्रानिक्स कांटा, फुट पंप बरामद किया। आपूर्ति विभाग के प्रभारी खाद्य अधिकारी के निर्देश पर पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल और राहुल डांगी भी मौके पर पहुंच गए। पूर्ति विभाग ने मौके से सिलेंडर के अलावा अन्य सामान को जब्त कर लिया। पूर्ति निरीक्षक राहुल डांगी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने इंद्रानगर निवासी दुकान स्वामी अमन कुमार गुप्ता को धारा 3/7 के तहत गिरफ्तार कर लिया। बरामद सिलेंडरों में 23 घरेलू, दो व्यवसायिक, पांच-पांच किलो के दो पेट्रोमेक्स शामिल हैं। पता चला है कि दुकानदार कई दिनों से अवैध रीफिलिंग का धंधा कर रहा था। विवाद होने पर मामला पुलिस तक पहुंच गया था।

25 सितंबर को जिला पूर्ति निरीक्षक पर हुआ था हमला
गैस की कालाबाजारी पकड़ने पर 25 सितंबर को जिला पूर्ति निरीक्षक रवि सनवाल पर आंवला वन चौकी पर सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे लोगों ने हमला कर दिया था। तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था लेकिन इसके बाद सब चुप होे गए।
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15 दिन ही चल पा रहा है सिलेंडर
सर्द मौसम में गैस की खपत ज्यादा होती है फिर भी पति-पत्नी और दो बच्चों के परिवार में एक सिलेंडर आसानी से एक महीना चल जाता है लेकिन इन दिनों सिलेंडर 15 दिन में ही खत्म हो जा रहा है। सिलेंडर लेते समय जब कर्मचारियों से इस बारे में पूछा जाता है तो वे ऊपर से ही ऐसा होने की बात कहकर झगड़ने लगते हैं।

सिलेंडर का क्यों नहीं होता वजन
प्रशासन अब तक ऐसी व्यवस्था नहीं बना पाया है कि घरों में पहुंचने वाला सिलेंडर ग्राहक के सामने ही तोला जाए। सिलेंडर देने वालों के पास वजन कांटा अनिवार्य रूप से हो। कई शहरों में ऐसी व्यवस्था है कि लोगों के पास अपने कांटे हैं। वे सिलेंडर लेते समय उसका वजन करते हैं। गैस जरा भी कम होने पर सिलेंडर तुरंत वापस कर देते हैं लेकिन अपने जिले के अधिकारियों को लोगों की दिक्कत से कोई सरोकार नहीं।
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