हल्द्वानी। एक लाख रुपये की घूस लेते रंगेहाथों पकड़े गए वन दरोगा शैलेंद्र सिंह चौहान का बयान वन विभाग के अधिकारियों के लिए मुसीबत बन सकता है। पता चला है कि रेंजर के अलावा कई अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। हालांकि जांच लोकसभा चुनाव के चलते कुछ दिनों के लिए थमी हुई है।
सतर्कता विभाग ने दो अप्रैल को एक लाख रुपये घूस लेते हुए गुलजारपुर वन चौकी तराई पश्चिमी वन प्रभाग रामनगर में तैनात वन दरोगा शैलेंद्र सिंह चौहान को भवानीगंज चौराहे से गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि काशीपुर के खनन कारोबारी से दो वाहनों को छोड़ने के एवज दो लाख रुपये की घूस मांगी थी। इस मामले में प्रथम दृष्टया रेंजर आर के वर्मा का नाम सामने आने पर उच्चाधिकारियों ने उनको डीएफओ कार्यालय में संबद्ध कर दिया। इस मुकदमे की जांच निरीक्षक संजय पांडे कर रहे हैं। जांच टीम ने भ्रष्टाचारियों को घेरे में लेने के लिए काफी साक्ष्य जुटाए हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस मामले में वन दरोगा के अलावा विभाग के कई लोगों से पूछताछ की जाएगी। जांच का दायरा सिर्फ रेंजर तक सीमित नहीं रहेगा। चूंकि विवेचक लोकसभा चुनाव के चलते ऊधमसिंहनगर चले गए हैं। इस कारण विवेचना एक सप्ताह के लिए थम गई है।
चुनाव बाद बढ़ेगा जांच का दायरा
घूसकांड : चुनाव बाद रेंजर और अफसरों से भी की जाएगी पूछताछ