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राजू परगई और अमित आर्य के पांचां हत्यारोपी बरी

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हल्द्वानी। अपर जिला जज प्रथम की अदालत ने बहुचर्चित राजू परगाईं और अमित आर्य दोहरे हत्याकांड में एनएसजी कमांडो समेत पांचों आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया है।
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पांच सितंबर 2011 को पनियाली निवासी राजू परगाईं पुत्र लक्ष्मण सिंह परगाईं और अमित आर्य पुत्र नरेश चंद्र आर्य निवासी राजपुरा के शव फोर्ड आइकॉन कार संख्या यूके 04 जी 3308 में श्यामखेत के निकट जंगल में मिले थे। दोनों की धारदार हथियारों और पत्थरों से कुचल कर और गोली मारकर निर्ममता से हत्या की गई थी। मृतक राजू के मामा जमन सिंह निवासी अल्मोड़ा ने भवाली कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने दो-तीन दिनों में ही हत्याकांड का खुलासा करते हुए एनएसजी कमांडो लक्ष्मण सिंह उर्फ लक्की कमांडो निवासी पनियाली, हृदयेश कुमार निवासी दमुवाढूंगा, मनीष कुमार निवासी जवाहर ज्योति, प्रकाश सिंह निवासी ब्लाक थाने के सामने कठघरिया, वीरेंद्र वोरा निवासी गौलापार को आरोपी बनाया था। पुलिस ने मौके से लक्की कमांडो की पिस्टल का कवर भी बरामद किया था। तब से मामला न्यायालय में चल रहा था।
अभियोजन पक्ष ने वाद साबित करने के लिए 10 गवाह पेश किए। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम नितिन शर्मा की अदालत ने सभी गवाहों और दलीलों को सुनने के बाद साक्ष्यों के अभाव में पांचों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर सहायक शासकीय अधिवक्ता अतुल शाह ने पैरवी की थी जबकि बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बहादुर सिंह पाल, राजेंद्र सिंह और अनिल रजवार ने पैरवी की।
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राजू परगईं और अमित आर्य की पांच सितबंर 2011 को कर दी गई थी हत्या
जिला जज प्रथम की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया

मोदी की सुरक्षा में भी रहा था लक्की कमांडो
हल्द्वानी। असम राइफल्स से प्रतिनियुक्ति पर एनएसजी में आया लक्की कमांडो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में भी तैनात रहा है। 2011 में मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। तब उनकी तीन-तीन माह की सुरक्षा ड्यूटी पर लक्की कमांडो भी तैनात हुआ था। हत्याकांड के समय वह चंडीगढ़ में तैनात था और उसे 10 सितंबर को दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करनी थी।
न्यायालय में तैनात रहा भारी पुलिस बल
हल्द्वानी। बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड के फैसले के बाद दो गुटों में फिर से बवाल नहीं हो इसलिए मंगलवार को एहतियात के तौर पर चार थानों की फोर्स बुलाई गई थी। नैनीताल रोड स्थित जजी परिसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। फैसला सुनाने के बाद ही वादी प्रतिवादियों को तत्काल कोर्ट से बाहर किया गया।

हत्याकांड जैसे संगीन जुर्म के वाद को पांच-छह अदालतों में यहां-वहां घुमाया गया। मौके से लक्की कमांडो की पिस्टल की कवर, अंगूठे के निशान, काल डिटेल मिली थी। फिर भी सात साल की पैरवी के बाद भी हमें न्याय नहीं मिला। अब ऊपरी अदालत में वाद दायर करेंगे। हमें डर है कि हमारे परिजन और हम पर भी हमला हो सकता है।
-जमन सिंह, राजू परगाईं का मामा और वादी
सात साल तक न्यायालय के चक्कर लगाए। आज जब फैसला आने वाला था तो शाम को हमें घर भेज दिया, बाद में पता चला कि सभी दोषमुक्त हो गए हैं। कोर्ट में होती तो अपनी बात रख पाती, ये सब मिलीभगत है। मेरे पति को पांचों ने नहीं मारा तो किसने मारा था?
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-मधु परगाईं राजू परगाईं की पत्नी
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