हल्द्वानी। नैनीताल रोड स्थित होटल एसवी के कमरा संख्या-305 में दिल्ली के टूर एंड ट्रेवेल्स व्यवसायी मंदीप सिंह का शव पड़ा मिला। पुलिस ने दरवाजे का ताला तोड़कर शव बाहर निकाला। कमरे से शराब की तीन बोतलें बरामद हुई हैं। पुलिस को आशंका है कि शराब की ओवरडोज से कारोबारी की मौत हुई है। भोटिया पड़ाव पुलिस इस घटना की जांच कर रही है।
होटल एसवी के मैनेजर अनिल टम्टा ने बताया कि पश्चिमी दिल्ली के 101 जेल रोड आशा पार्क निवासी व्यवसायी मंदीप सिंह (33) पुत्र परमिंदर सिंह 30 दिसंबर की शाम पांच बजकर 25 मिनट पर होटल आए थे। उन्होंने कमरा संख्या 305 बुक किया गया। मंगलवार की दोपहर 11 बजकर 45 मिनट पर होटल मैनेजर ने कॉल की मगर उनका कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद होटल के कर्मचारी नरेंद्र को उनके कमरे में भेजा गया। कमरे में टीवी चल रहा था। दरवाजा खटखटाने पर कोई उत्तर नहीं मिला। तीन बजे अन्य कर्मचारियों ने फोन किया तब भी कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद होटल मैनेजर ने घटना की सूचना भोटिया पड़ाव चौकी पुलिस को दी। चौकी प्रभारी प्रताप सिंह नगरकोटी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दरवाजे का ताला तोड़ दिया। बिस्तर के नीचे व्यवसायी गिरे पड़े थे। पुलिस ने तत्काल एंबुलेंस से बेस अस्पताल भेजा लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। कारोबारी के पर्स में दस हजार रुपये, आईडी और अन्य कागजात मिले। शव की शिनाख्त होने के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। परिजन पंजाब के अमृतसर में थे। पुलिस ने होटल का कमरा सील करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया।
होटल के कमरे में मृत मिला दिल्ली का कारोबारी
बिस्तर के नीचे फर्श पर पड़ा था शव, मौके से शराब की बोतलें बरामद
पुलिस ने ताला तोड़कर निकाला शव, कमरा सील
तीन बोतलें बरामद
पुलिस ने होटल के कमरे से मैकडावल का अद्धा, क्वाटर और रायल स्टैग की एक बोतल बरामद की है। तीनों बोतलों से काफी मात्रा में शराब पी गई थी।
डेढ़ महीने से हल्द्वानी में था
कारोबारी के दोस्त ने पुलिस को बताया कि मंदीप डेढ़ महीने से दुर्गा सिटी सेंटर स्थित टूर एंड ट्रेवेल्स से जुड़े थे। वह कमीशन पर काम करते थे। होटल में रुकने से पहले अपने दोस्त के साथ रूपनगर मुखानी में रहते थे। उनकी दो दिन पहले दोस्त से बातचीत हुई थी। उन्होंने भीमताल जाने की बात कही थी।
डिस्टर्ब नहीं करने के लिए चेताया था
होटल मैनेजर ने बताया कि चाक आउट का समय होने पर 31 दिसंबर की दोपहर एक कर्मचारी को कारोबारी के पास भेजा गया था। उन्होंने खाने के पैसे का भुगतान कर दिया। साथ ही मैनेजर को कहा था कि कर्मचारी को भेजकर डिस्टर्ब मत करो, जब जरूरत होगी तो वह वेटर को बुला लेंगे।। शांति के लिए होटल में ठहरा जाता है।