हल्द्वानी। हादसों में लोग जान गंवा रहे हैं मगर पुलिस न तो हादसों के कारणों को तलाश पा रही है न ही रोकने का प्रयास कर रही है। अमूमन हादसों का समय रात या भोर में होता है लेकिन पुलिस चेकिंग की खानापूरी दिन में कर देती है। गाड़ियों की रफ्तार पर लगाम नहीं लग पा रही है।
रामपुर रोड के गन्ना सेंटर, एस मोड़, अमर उजाला कार्यालय के सामने आठ हादसे रात और सुबह में ही हुए हैं। एक महीने के अंदर पीएसी के जवान सहित छह लोगों की मौत हो चुकी है। बरेली रोड पर प्रधान पति सहित कई लोग रात में हादसे के शिकार हुए हैं। नैनीताल रोड और कालाढूंगी रोड पर भी 90 फीसदी रात में ही सड़क हादसे हुए हैं।
लेकिन पुलिस ने वाहनों की रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए अपना समय नहीं बदला है। पुराने नियमों के अनुसार पुलिस दोपहर या शाम को ओवर लोडिंग, ओवर स्पीड और शराब पीकर गाड़ी चलाने के खिलाफ अभियान चलाती रहती है।
बारात के चलते जाम भी अमूमन सात या आठ बजे ही लगता है। हालांकि सीपीयू की ड्यूटी का समय 11 बजे रहता है लेकिन दिन में ड्यूटी करने के बाद रात में सीपीयू सड़कों से गायब रहती है। हादसे की सूचना मिलने पर ही सीपीयू मौके पर पहुंचती है। लोगों का कहना है कि नववर्ष पर पुलिस ने रात में चेकिंग अभियान चलाया था। तब रफ्तार से भागने वाले पकड़े गए या रास्ता बदल दिए थे।
सड़क हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने पर विचार किया जा रहा है। रात के समय सघन चेकिंग अभियान का उल्टा असर होने की आशंका भी रहती है। यह देखा गया है कि पुलिस की गाड़ी देखकर रात में ओवर स्पीडिंग की कोशिश की जाती है। इससे हादसा होने की आशंका और बढ़ जाती है।