नैनीताल। जालसाजों ने फर्जी चेक बनाकर स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से छह लाख रुपये हड़पने का प्रयास किया। स्टेट बैंक प्रबंधक ने भुगतान से पहले खाता धारकों से सत्यापन किया तो षड्यंत्र का भंडाफोड़ हो गया। हालांकि लिमिटेड बैंकों के रुचि न लेने के कारण इस साजिश के सूत्रधार का पता नहीं चल पाया है।
ठगों ने पिछले दिनों नगर की दो प्राइवेट बैंकों में बिहार निवासी धीरेंद्र कुमार के नाम से दो चेक जमा किए। चेक पास कराने के लिए मल्लीताल स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा पहुंचे। यहां बैंक कर्मचारियों ने बैंक प्रबंधक सुधीर चौधरी को प्रकरण से अवगत कराया। बैंक प्रबंधक ने तुरंत खाताधारकों से फोन पर चेक जारी किए जाने के बारे में पूछा। खाताधारकों ने धीरेंद्र कुुमार के नाम से कोई चेक जारी न करने की बात कही। बैंक प्रबंधक तुरंत भांप गए कि प्रकरण जालसाजी का है। ऐसे में उन्होंने भुगतान रोक दिया। प्रबंधक ने बताया कि धीरेंद्र कुमार के नाम से ही दो बैंकों में खाते खोले गए हैं और इन्हीं खातों के जरिए धोखाधड़ी का प्रयास किया गया है। जिन लोगों के खाते से यह पैसा निकालने की कोशिश की गई है, उनमें एक व्यक्ति महाराष्ट्र और दूसरा मध्य प्रदेश का निवासी है।
स्टेट बैंक कर्मचारियों ने विफल किया जालसाजी का प्रयास
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के खाता संचालकों से हुआ था ठगी का प्रयास
जालसाजों ने नैनीताल के दो लिमिटेड बैंकों में चेक लगाए
बैंकों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
भले ही स्टेट बैंक कर्मचारियों की सूझबूझ से खाताधारकों को छह लाख रुपये का चूना लगने से बच गया, लेकिन अपने यहां से चेक पास करने वाले दोनों लिमिटेड बैंकों की भूमिका सवालों में है। इन बैंकों ने बिना किसी जांच पड़ताल के चेक पास कर दिए। दोनों बैंकों ने इस धोखाधड़ी के प्रयास के पीछे कौन है, यह भी जानने का प्रयास नहीं किया।
दो लिमिटेड बैंकों में फर्जी चेक जमा हुए थे। चेक पास होने से पहले हमने खाता धारकों से पूछा तो पता चला कि चेक फर्जी हैं। हमने भुगतान रोक दिया है।
-सुधीर चौधरी, शाखा प्रबंधक, मल्लीताल स्टेट बैंक मुख्य शाखा।