बिंदुखत्ता (नैनीताल)। पूर्व फौजी रतन सिंह सेना में रहकर पहले देश के लिए लड़े, अब बेटे के कातिलों को सजा दिलाने के लिए लड़ना पड़ रहा है। बूढ़े कंधों पर अपने जवान बेटे की अर्थी उठाने के बाद जहां रतन सिंह पूरी तरह से टूट चुके हैं, वहीं कातिलों को सजा दिलाना अब उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
गुरुग्राम में रमेश की हत्या के बाद उसके पिता पूर्व सैनिक रतन सिंह को अपने बेटे को खोने का गम तो है साथ ही हत्यारों के प्रति आक्रोश भी। पूर्व सैनिक रतन सिंह ने कहा कि उन्होंने सेना में देश के दुश्मनों से डटकर लोहा लिया। रिटायर होने के बाद उन्होंने अपने बेटे के साथ खुशहाल जिंदगी के सपने देखे थे। मगर जालिमों ने उसके बेटेे को मौत के घाट उतार दिया। उन्हें नहीं पता था कि इस उम्र में भी उन्हें एक और जंग लड़नी पड़ेगी। वे बेशक उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं लेकिन एक जांबाज सैनिक की तरह अपने बेटे के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए अंतिम सांस तक लड़ते रहेंगे और आरोपियों को फांसी के फंदे तक पहुंचा कर ही दम लेंगे।