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हत्याकांड को अंजाम देने वाले कौन

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मुजफ्फरनगर में बीजेपी नेता की हत्या - फोटो : SELF
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हल्द्वानी। राजू परगाईं और अमित आर्य हत्याकांड के आरोपियों के बरी हो जाने बाद अब इस दोहरे हत्याकांड से जुडे़ सारे सवाल एक बार फिर से उठ खड़े हो गए हैं। पीड़ित पक्ष को सात साल बाद भी न्याय की दरकार है। पुलिस की जांच पर सवाल उठ रहे है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले कौन हैं।
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सात साल पहले के इस मामले में यह तो साफ है कि हत्याएं हुई हैं। पुलिस ने पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर मामले को खोलने का दावा तक किया था। अब सात साल बाद न्यायालय ने पांचों को बरी कर दिया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि हत्याओं को अंजाम देने वाले ये नहीं तो आखिर कौन थे? इन सात सालों में कातिलों तक पुलिस क्यों नहीं पहुंची? इन सात सालों में पुलिस को कोई नया तथ्य या साक्ष्य का न मिलना भी सवाल खड़े कर रहा है।
दोहरे हत्याकांड में उस समय मौके पर पुलिस को एक आरोपी के अंगुलियों के निशान मिले थे। मौके से पिस्टल का कवर मिला था और यह कवर एक आरोपी के पिस्टल के थे। राजू परंगाई पर छह साल में हत्या, रंगदारी के करीब छह मुकदमे दर्ज थे। इतना होने के बाद भी साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों का बरी होना पुलिस की जांच की क्षमता पर सवाल खड़े करता है। पुलिस की स्थिति इस समय प्रदेश में किसी से छुुपी भी नहीं है।
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कन्याल हत्याकांड की गुत्थी भी अनसुलझी
ब्लॉक प्रमुख बलवंत सिंह कन्याल की हत्या के मामले का भी यही हश्र हुआ था। कन्याल की कालाढूंगी में 2009 में हत्या हुई थी। कन्याल की हत्या के आरोपी नीरज तिवारी अदालत से बरी हो गया था। नीरज के बरी हो जाने के बाद आज भी यह सवाल बरकरार है कि आखिरकार कन्याल की हत्या किसने की। कन्याल की हत्या के बाद आक्रोशित लोगों ने कालाढूंगी थाना तक फूूंक दिया था और एक प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिसकर्मी तक को मार डाला था। कालाढूंगी कांड के नाम से चर्चित इस मामले को भी अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है।
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आरोपियों के बरी होने पर हुई आतिशबाजी
आरोपियों के बरी होने पर रामपुर रोड और कालाढूंगी रोड पर भी कई जगह पर आतिशबाजी हुई। समर्थकों ने कई जगह मिठाई भी बांटी और जश्न मनाया।
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