हल्द्वानी। ग्राम पंचायतों में लगाई जा रही सोलर स्ट्रीट लाइटों में गड़बड़ियां किए जाने का मामला सामने आया है। किसी विकासखंड की ग्राम पंचायतों में 12 से 13 हजार रुपये में पूरा सोलर सिस्टम स्थापित किया जा रहा है तो किसी में 18 से 20 हजार रुपये तक सोलर स्ट्रीट लाइट लगाए जाने का मामला संज्ञान में आया है।
आरटीआई कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ने विभिन्न विकासखंडों और ग्राम पंचायतों में लगाए गए स्ट्रीट लाइटों की जानकारी मांगी तो उन्हें बताया गया कि भीमताल विकासखंड में टेंडर से प्रति सोलर लाइट पैनल 12494 रुपये में लगाया गया है। विकासखंड धारी में बिना टेंडर सिर्फ कोटेशन के आधार पर 18 से 20 हजार रुपये प्रति सोलर पैनल लाइटें लगाई गई हैं। भीमताल और धारी में सोलर स्ट्रीट लाइट पैनल लगाने वाली एजेंसियां भी अलग-अलग हैं। राजेंद्र सिंह बताते हैं कि सोलर स्ट्रीट लाइट बिना टेंडर के नहीं लगाए जा सकते लेकिन एक एजेंसी गुपचुप तौर पर मनमाने दामों पर सोलर लाइटें लगा रही है। दोनों स्थानों पर लगाए गई सोलर लाइटें और पैनल एक ही कंपनी और समान क्षमता की हैं। बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायतों में सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने वाली एजेंसी कुछ प्रधानों से साठगांठ कर मनमाने दामों पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगा रही है। इन पर उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा अभिकरण (उरेडा) का भी कोई नियंत्रण नहीं है। सोलर स्ट्रीट लाइटों का सरकारी स्तर पर कोई निश्चित मूल्य भी तय नहीं किया गया है।
कहीं 12 हजार तो कहीं 20 हजार रुपये तक लगाए जा रहे हैं सोलर पैनल
कहीं टेंडर तो कहीं नाम के कोटेशन पर लग रही लाइटें
उरेडा के माध्यम से लगाई जाने वाली सोलर लाइटों में टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ग्राम पंचायतों और विकासखंडों में किन मानकों के तहत लगाई जा रही हैं, इसकी कोई जानकारी नहीं है।
- संदीप भट्ट, परियोजना अधिकारी, उरेडा।