बीती शाम जंतवालगांव स्थित एक गौशाला में तेंदुआ घुस गया। उसी वक्त जानवरों को चारा देने पहुंचे बहादुर की नजर जैसे ही तेंदुए पर पड़ी तो उसने गौशाला से बाहर निकलकर दरवाजे बाहर से बंद कर दिए, जिससे तेंदुआ गौशाला में कैद हो गया।
सूचना पर काठगोदाम और नैनीताल से पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद किसी तरह तेंदुए को बेहोश कर गौशाला से बाहर निकाला। देर रात तेंदुए को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर पहुंचा दिया गया। जंतवालगांव निवासी रघुवर सिंह जंतवाल के घर के पास ही उनकी गौशाला है।
शुक्रवार देर शाम करीब साढ़े सात बजे जंतवाल के घर में काम करने वाला बहादुर नामक युवक जानवरों को चारा देने के लिए जैसे ही गौशाला में गया तो वहां तेंदुआ नजर आया। इसके बाद बहादुर ने बाहर निकलकर दरवाजे को बाहर से बंद कर दिया और चीख पुकार शुरू कर दी। देखते ही देखते मौके पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए।
सूचना पर रात करीब दस बजे वन विभाग के एसडीओ उमेश तिवारी, आरओ मनोरा रेंज मुकुल शर्मा, आरओ जू मनोज साह, मनोज कुमार पांडे, आनंद लाल समेत कई वन कर्मी पिंजरा और ट्रेंकुलाइजर गन लेकर मौके पर पहुंचे। बाहर से ग्रामीणों का शोर सुन तेंदुआ गौशाला के एक कोने में दुबक गया।
एसडीओ तिवारी ने बताया कि ढाई-तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तेंदुए को किसी तरह ट्रेंकुलाइजर गन से बेहोश कर पिंजरे में कैद किया गया। उन्होंने बताया कि पकड़े गए तेंदुए की उम्र लगभग नौ साल के करीब है और वह नर है।
उन्होंने बताया कि तेंदुए के एक पंजे में चोट थी और उसकी बाई आंख पूरी तरह से सफेद थी। एसडीओ के मुताबिक हो सकता है कि तेंदुए को बाई आंख से नहीं दिखता हो।