हाईकोर्ट ने बाल कैदियों को एडल्ट जेल में रखे जाने के मामले पर सरकार को अतिरिक्त समय देते हुए विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होगी।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट की ओर से जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि उत्तराखंड की विभिन्न जेलों में 18 वर्ष से कम उम्र के बाल कैदियों को वयस्क कैदियों के साथ ही रखा गया है, जो जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 के प्रावधानों के विपरीत है। याचिका के अनुसार सरकार और सीएम को इस संबंध में भेजे गए पत्राें पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है।