रामनगर। मध्य प्रदेश की सरकार ने कोरोना से बचने के लिए ऐसी दवा तलाश की है, जो रामनगर में वर्षों से बन रही है। आईएमपीसीएल का दावा है कि इस दवा के इस्तेमाल से कोरोना वायरस शुरुआती दौर में ही मर जाता है। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने इंडियन मेडिसन फार्मासिटीकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) कंपनी से तीनों दवाइयों की खेप मांगी है, जिसके लिए एमपी सरकार 35.50 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च कर रही है।
ये है वह तीन दवाइयां
आईएमपीसीएल के मुख्य प्रबंधक मनजीत सिन्हा ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार से उन्हें एक पत्र मिला है, जिसमें एमपी की सरकार ने उनसे यूनानी दवा ‘त्रियाके नजला’, ‘शर्बते उन्नाब’ और ‘हब्बे बुखार’ मांगी हैं। इन तीनों दवाइयों को आईएमपीसीएल वर्षों से बना रहा है और यह दावा कोरोना वायरस की रोकथाम में भी बेहद कारगर साबित हो सकती है।
मध्य प्रदेश के 28 जिलों में भेजी जाएंगी दवाइयां
मध्य प्रदेश के संचालनालय आयुष की सहायक संचालक डॉ. वंदना बोराना के पत्र से साफ है कि यह दवाइयां मध्य प्रदेश के 28 जिलों की सीएचसी, पीएचसी, हेल्थ सेंटर आदि में सप्लाई होगी। संदिग्ध दिखने वाले व्यक्तियों को यह दवा दी जाएगी। आईएमपीसीएल फैक्टरी के जनरल मैनेजर पनी राम आर्य ने बताया कि उनके यहां दवाइयां पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं यदि अन्य सरकारें भी उनसे इन दवाइयों की मांग करती हैं तो वह देने को तैयार है। मध्य प्रदेश सरकार ने 35 लाख 50 हजार रुपये की दवाइयां मांगी हैं।