रामनगर/हल्द्वानी। वेस्ट वॉरियर्स संस्था ने उत्तराखंड के कार्बेट क्षेत्र में सफाई अभियान चलाकर कई गांवों का स्वरूप बदल दिया है। ये वॉरियर्स घर-घर जाकर सर्वे करके लोगों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि उनके स्वास्थ्य और जीवन में सुधार आ सके।
वॉरियर्स लोगों को चिप्स के बेकार पैकेट, पुराने कपड़ों से बैग व सजावट की चीजें बनाना सिखाते हैं। इस संस्था के माध्यम से लोगों को आजीविका के लिए रोजगार भी मिल रहा है। गांवों समेत मैराथन, आईपीएल मैच, संगीत समारोह आदि बड़े कार्यक्रमों में भी यह संस्था नाममात्र का शुल्क लेकर कूड़ा निस्तारण की सेवा देती है।
इस स्वयंसेवी संस्था की तीन शाखाएं हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला, देहरादून और कार्बेट में स्थित हैं। यह संस्था ग्रामीण लोगों, होटलों, सरकारी संस्थाओं को सस्ते व सुविधाजनक तरीके से कूडे़ का निस्तारण और प्रबंधन का प्रशिक्षण देती है ताकि लोग कूड़े से उत्पन्न विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचे रहें।
30 लोगों की टीम कार्बेट क्षेत्र के गांवों में यह कार्य करती है। वॉरियर्स की टीम स्कूलों में शिक्षा के माध्यम से बच्चों को जागरूक करती हैं। यह आयोजन ‘चिल्ड्रन डे’ के नाम से होता है, जिसमें चित्रकारी, पढ़ाई, खेल से उन्हें कूड़ा निस्तारण के तरीके सिखाए जाते हैं।
अपने इस मिशन में स्थानीय लोगों को शामिल कर यह उन्हें कूडे़ का कम व दोबारा इस्तेमाल और रिसाइकल करना सिखाते हैं। ये वॉरियर्स घरों, मंदिर परिसर आदि से कूड़ा एकत्रित कर अपने विभिन्न वेस्ट स्टोर में छंटनी करके सही तरीके से निस्तारण करते हैं। बचे हुए खाने से जैविक खाद बनाई जाती है।
संस्था की कार्बेट क्षेत्र की प्रोजेक्ट मैनेजर मीनाक्षी पांडे ने बताया कि अल्मोड़ा जिले के मर्चुला से लेकर छोटी हल्द्वानी तक 48 क्षेत्रों में सेवा और कार्यशाला चलाई जा रही हैं। संस्था ने कार्बेट क्षेत्र के 60 स्कूलों में करीब 3000 छात्रों के साथ जागरूकता के कार्यक्रम किए हैं।
गांवों में बढ़ती गंदगी देख भकराकोट निवासी मीनाक्षी ने वेस्ट वरियर्स से 2013 में संपर्क किया और आज वे इस संस्था के साथ मिलकर बेहतर काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा दी गई धनराशि से वे स्कूलों में वॉटर फिल्टर्स और कूड़ेदान दिलाते हैं।
इस संस्था के कार्य से लाभान्वित छोई गांव के सुरेंद्र ने बताया कि वॉरियर्स के आने से पहले ग्रामीण कूडे़ को आसपास या नहर में फेंक देते थे, जिससे गांव में गंदगी रहती थी। अब वे वॉरियरर्स से मिले बैग में कूड़ा भरते हैं और गांव अब साफ सुथरा रहता हैं। क्यारी गांव के पूरन रावत ने बताया कि गांव वाले पहले हर प्रकार के कूड़े को जला देते थे, जिससे प्रदूषण भी होता था। अब वरियर्स की सक्रियता से वातावरण स्वच्छ हुआ है।