मंडी समिति ने व्यवसायियों द्वारा नवीन मंडी परिसर में केला पकाने को राइपिनिंग प्लांट लगाने के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। निर्णय लिया कि राइपिंनिंग प्लांट खुद समिति की ओर से लगाया जाएगा। इसके लिए एक कमेटी गठित की है, जिसमें दो व्यापारी प्रतिनिधियों को भी शामिल किया है। इसके अलावा मंडी में सीसीटीवी कैमरे, एलईडी लाइटें लगाने का फैसला भी किया गया।
बृहस्पतिवार को मंडी समिति की सुमित हृदयेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए कुल 14.55 करोड़ का बजट पारित किया गया। मंडी समिति द्वारा गत वर्ष के सापेक्ष मंडी शुल्क की दर एक प्रतिशत होने के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष फरवरी तक 60.71 लाख की वृद्धि होने पर सराहना की गई। गौलापार स्थापित किए गए कूड़ा निस्तारण प्लांट के बारे में बताया गया कि प्लांट को प्रतिदिन 20 टन जैविक कूड़े की आवश्यकता होगी, जबकि मंडी में केवल एक या दो टन ही जैविक कूड़ा निकलता है, इसलिए प्लांट को ठेके पर देने का निर्णय लिया गया।
मंडी चेयरमैन हृदयेश ने पत्रकारों को बताया कि मंडी समिति द्वारा राइपिनिंग प्लांट लगाया जाएगा। जिसमें सभी व्यापारियों को केला पकाने की सुविधा मिल सकेगी। मंडी चेयरमैन सुमित हृदयेश ने फल-सब्जी मंडी में सीमेंट के गोदाम बनाने की
खबर को गंभीरता से लिया है। उन्होंने मंडी सचिव को निर्देश दिए कि गल्ला
गोदाम की आड़ में बनाए गए सीमेंट के सभी गोदामों को चिन्हित कर उनके खिलाफ
कार्रवाई की जाए।
मंडी में स्थान चयन करने के लिए कमेटी सदस्य सुरेंद्र बर्गली, डीके पंत, लेखाकार दिनेश चंद्र जोशी, मंडी निरीक्षक तेज प्रकाश गुरुरानी, भुवन गोस्वामी तथा व्यापार संघ के दो प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। बैठक में मंडी उपाध्यक्ष सलीम अंसारी, कार्तिक बिष्ट, यशपाल आर्य, विनोद दानी, सचिव विनोद कुमार लोहुमी आदि थे।