प्रदेश में विभिन्न कंपनियों को अब अपने प्लास्टिक उत्पादों की बिक्री बेरोकटोक करने की अनुमति नहीं मिलेगी। कंपनियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में पंजीकरण कराना होगा। साथ ही अपने प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए प्लान भी बनाना होगा।
हाईकोर्ट की ओर से पारित महत्वपूर्ण आदेश में ये निर्देश दिए गए हैं। यह आदेश कोर्ट की वेबसाइट में जारी किया गया है। कोर्ट ने कहा है कि कंपनियां यदि प्लास्टिक कचरे के निस्तारण का इंतजाम खुद नहीं करती हैं, इसे संबंधित निकाय करते हैं तो कंपनियों को उन्हें प्रतिपूर्ति देनी होगी। ऐसा नहीं करने पर राज्य में उनके उत्पादित माल के उत्पादन, बिक्री पर रोक लगाई जाएगी। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर राज्य के अधिकारी संवेदनशील नहीं हैं।
लगता है कि उन्हें अपने दायित्वों और कर्तव्यों सहित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अधिनियमों और नियमों की जानकारी ही नहीं है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि मुख्य सचिव राज्य, जिला और पंचायत स्तर पर अधिकारियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रावधानों से अवगत कराएं।
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पक्ष
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोर्ट में दाखिल शपथ पत्र में बताया गया था कि अब तक राज्य में 174 कंपनियों ने पंजीकरण कराया है। हजारों कंपनियों के उत्पादों का उत्पादन, बिक्री यहां हो रही है।
पीसीबी पर भी जानकारी
जानकारी के अनुसार चुनिंदा कंपनियां ही ऐसी हैं, जिनकी ओर से प्लास्टिक कचरा निस्तारण को लेकर कार्ययोजना तैयार की गई है। अन्य कंपनियों ने केवल पंजीकरण कराया है, प्लान नहीं दिया है। हाईकोर्ट ने समय सीमा के अंदर पंजीकरण नहीं कराने वाली कंपनियों को पीसीबी की ओर से 15 दिन का समय दिए जाने पर भी नाराजगी जताई है।
2016 में जारी हो गई थी अधिसूचना
उत्तराखंड शासन ने फरवरी 2016 में प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट से संबंधित अधिसूचना जारी की थी जिसमें कहा था कि प्लास्टिक निर्माता कंपनियों के साथ ही मॉल, मल्टीप्लैक्स, होटल, मोटल, रेस्टोरेंट आदि में प्लास्टिक वेस्ट के लिए स्थान निर्धारित किए जाएं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के 2019 केआदेश के अनुसार जिलों के जिलाधिकारी आवश्यक रूप से अपने जिलों में उत्पादित होने वाले प्लास्टिक कचरे की मात्रा और अन्य जानकारियां एकत्र कर पीसीबी को उपलब्ध कराएंगे।