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सरकारी अस्पताल में चल रहा कमीशनखोरी का खेल, गरीब मरीजों के साथ हो रही खुलेआम लूट

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हल्द्वानी। सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने और बेहतर इलाज के लिए सरकार तमाम जतन कर रही है वहीं विभाग से जुड़ी आशाएं इस पर पलीता लगा रही हैं। हल्द्वानी के महिला अस्पताल में जांच के लिए आने वाली गभवर्ती महिलाओं को कमीशन के लिए प्राइवेट लैब या अस्पतालों में भेजा जा रहा है। कई दिनों से शिकायत के बाद बुधवार को अस्पताल की मुखिया ने खुद यह मामला पकड़ लिया। अस्पताल प्रशासन ने कार्रवाई के लिए मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी है।
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महिला अस्पताल में आने गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड और थायराइड जांच के लिए कुछ आशाओं की ओर से गुमराह कर निजी अस्पताल ले जाने की सूचना मिल रही थी। इसकी शिकायत बाकायदा आशाओं ने ही अस्पताल की सीएमएस से की थी। महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के दो पद काफी लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। व्यवस्था बनाने के लिए पदमपुरी से एक रेडियोलॉजिस्ट को संविदा के तहत तैनात किया गया है। इस दौरान जांच के लिए अस्पताल पहुंचने वाली कुछ गर्भवती महिलाओं को जबरन निजी अस्पताल ले जाने का आरोप लगा। गर्भवती महिला को यह कहकर बरगलाया गया कि अस्पताल में थायराइड और अल्ट्रासाउंड की जांच नहीं हो रही है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उनके यहां यह जांचें नियमित रूप से चल रही थी और नि:शुल्क की जाती हैं। महिलाओं से यह भी कहा गया कि बेस अस्पताल में यह जांच नहीं हो रही है। यह एक अस्पताल का मामला है। अगर पड़ताल की जाए तो इस तरह के खुलासे हो सकते हैं।
20 से 30 फीसदी कमीशन का खेल
महिला अस्पताल में आने वाली गरीब महिलाओं को बहला फुसलाकर निजी चिकित्सालय या प्राइवेट लैब ले जाता है। सूत्रों के मुताबिक जांच के लिए प्रति मरीज लाने पर करीब 20 से 30 फीसदी कमीशन तय होता है। इस कमीशन के लिए सरकार से वेतन लेने वाली आशाएं अपनी नौकरी तक दांव पर लगा रही हैं। अब देखना होगा कि कमीशन के खेल का खुलासा होने के बाद विभाग इन आशाओं पर क्या कार्रवाई करता है।
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गर्भवतियों की तीन बार अल्ट्रासाउंड जांच होती है
गर्भवती महिलाओं की नौ माह के दौरान तीन बार अल्ट्रासाउंड जांच होती है। थायराइड की जांच निजी अस्पतालों में पांच सौ से छह सौ रुपये और अल्ट्रासाउंड लेबल टू की जांच करीब दो से ढाई हजार रुपये में होती है। वहीं सरकारी अस्पतालों में यह जांच नि:शुल्क होती हैं।
आशाओं के कार्य-
जो गर्भवती महिलाएं अस्पताल तक नहीं पहुंच पाती उन्हें अस्पताल तक ले जाने की जिम्मेदारी सरकार ने आशाओं को दी है।
- राष्ट्रीय कार्यक्रम, टीकाकरण समेत सरकार के स्वास्थ्य कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी।
कुछ आशाओं की ओर से महिला मरीजों को जांच के लिए निजी अस्पतालों में ले जाने की शिकायत कई दिनों से मिल रही थी। इसकी शिकायत खुद एक आशा ने उनसे की थी। बुधवार को स्वयं मैंने एक मामला पकड़ा। इसमें महिला मरीज ने बताया कि आशा वर्कर जबरन थायराइड की जांच के लिए निजी अस्पताल ले गई थी। दो ब्लॉकों की आशा कार्यकत्रियों की भी शिकायत मिली है। मामला सामने आने के बाद ब्लॉक आशा कोऑर्डिनेटर के अलावा मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दिया है।
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उषा जंगपांगी, सीएमएस महिला अस्पताल हल्द्वानी
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