किसी भी दल की सरकार हो लेकिन जमरानी बांध में आ रही बाधाएं दूर नहीं हो सकी हैं। पीएम मोदी ने चुनाव में डबल इंजन मांगा तो जनता ने सूबे और उप्र की सत्ता देकर ट्रिपल इंजन भी दे दिया। यह ट्रिपल इंजन भी हल्द्वानी के लिए बेहद जरूरी जमरानी बांध को खींचने में नाकाम रहा है।
भाजपा हो या कांग्रेस, हर दल के चुनावी एजेंडे में जमरानी बांध को प्रमुखता से शामिल किया जाता है। सत्ता में आने के बाद यह एजेंडा कागजों में धूल फांकता है। केंद्र, उप्र, उत्तराखंड में भाजपा सरकार के होने के बाद हल्द्वानी वासियों की जमरानी बांध को लेकर उम्मीद जगी थी। उप्र से परिसंपत्तियों के बंटवारे, जल बंटवारे और बजट देने को लेकर होने वाले विवादों का निस्तारण हुआ।
उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, सत्ता में दूसरे नंबर के प्रकाश पंत जैसे शीर्ष स्तर ने भी मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की। इसके बाद संभावनाएं जताई जा रही थी कि ट्रिपल इंजन जमरानी बांध को कागजों से खींचकर धरातल पर ले आएगा। इधर जमरानी बांध को बनाने के लिए एक अलग डिवीजन बनाई थी जिसमें एक एसई, दो ईई, 13 एई, आठ जेई समेत लगभग 115 अधिकारियों कर्मचारियों की फौज खड़ी की थी।
इन सब को सिंचाई विभाग काम न होने की वजह से बैठे-बिठाए हर माह करीब 55 लाख रुपये इन अधिकारियों और कर्मचारियों को दे रहा है। इसी से परेशान सिंचाई विभाग ने ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत जमरानी डिवीजन से एक ईई, तीन एई, दो जेई समेत 20 स्टाफ को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सड़क बनाने के लिए भेज दिया है। इससे जमरानी बांध की उम्मीदों का झटका लगा है।