कत्यूरी वंशजों का पौराणिक तीर्थ स्थल पवित्र चित्रशिला धाम बुधवार रात जय जिया के उद्घोष से गुंजायमान रहा। कुमाऊं और गढ़वाल से पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने रात भर जागरण कर अपनी कुल देवी जिया रानी की जागर लगाकर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।
कुमाऊं और गढ़वाल के कत्यूरी वंशजों का तीर्थ स्थल रानीबाग स्थित चित्रशिला धाम को माना गया है। मान्यता है कि पवित्र उत्तरायणी पर्व पर कत्यूरी यहां आकर अपनी कुल देवी जिया रानी की जागर लगाकर सुख समृद्धि की कामना करते हैं। इस दौरान कुल के अन्य देवताओं को भी पवित्र गार्गी गौला नदी में स्नान कराने की परंपरा है।
कोई थकुली की तो कोई ढोल की थाप पर जागर लगाकर देवताओं का आह्वान करते हैं। पुरानी मन्नतों को निभाने के लिए भी लोग यहां पहुंचते हैं। अल्मोड़ा, रानीखेत, चौखुटिया, द्वाराहाट, भिकियासैंण, सल्ट, रामनगर आदि क्षेत्रों से सैकड़ों लोग बुधवार दोपहर ही चित्रशिला धाम में पहुंच गये।
किसी ने सामूहिक तो किसी ने एकल जागर लगाकर अपने देवताओं की पूजा अर्चना की। रानीखेत से पहुंचे उम्मेद सिंह ने बताया कि उनका परिवार दिल्ली में निवास करता है। लेकिन इस अवसर पर सभी परिवार के लोग एकजुट होकर यहां जागर लगाते हैं।
द्वाराहाट से आये लक्ष्मण सिंह के अनुसार पितरों के दिशा निर्देश पर वह परिवार के साथ यहां पहुंचे और जागर लगाई। रामनगर के बचे सिंह ने भी सपरिवार पहुंचकर मां की पूजा अर्चना की।
चित्रशिला धाम में पहुंचे भक्तों ने पूजा अर्चना के बाद मां जिया रानी की गुफा के भी दर्शन किये। इसके साथ ही नदी किनारे उभरी शिला का पूजन करने के बाद उसकी परिक्रमा कर मन्नत मांगी।
मान्यता है कि मां जिया रानी ने नहाने से पूर्व अपना घाघरा उक्त स्थान पर रखा था। जहां पर मां के जाने के बाद गोल शिला उभर गई। तब से यहां आने वाले भक्त फूल, चुनरी आदि चढ़ाकर शिला की पूजा करते हैं।
इस वर्ष पंचाग के अनुसार उत्तरायणी पर्व की तिथि 15 जनवरी को पढ़ने से आज भी कत्यूरी चित्रशिला धाम पहुंचकर मां जिया रानी की पूजा अर्चना करेंगे। रात भर जागरण कर जागर, स्नान आदि के बाद शुक्रवार सुबह अपने क्षेत्रों को वापस लौटेंगे।