ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट पर गंदगी का अंबार लगा है। घाट में जगह-जगह अधजली लकड़ियों के ढेर और कफन गौला में दूर-दूर तक बिखरे नजर आते हैं। इतना ही नहीं कई लोग तो दिवंगत हो चुके अपने सगे-संबंधियों की दवा और कपड़ों से लेकर बिस्तर तक चित्रशिला घाट में फेंक जाते हैं।
तराई-भाबर से लेकर पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्रों से लोग दाह संस्कार करने के अलावा कई अन्य कर्मकांड करने के लिए चित्रशिला घाट पहुंचते हैं, लेकिन घाट में सफाई के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। आसपास के लोगों के मुताबिक कई लोग जब शव लेकर घाट पर पहुंचते हैं तो साथ में दवाइयां, कपड़े और बिस्तर तक लेकर आते हैं और उसे गौला किनारे फेंक देते हैं। इससे जहां गौला में प्रदूषण फैलता है, वहीं जगह-जगह गंदगी के ढेर लग जाते हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक दीपक नौगाई बताते हैं कि हल्द्वानी में गौला के पानी को पेयजल के रूप में प्रयोग किया जाता है, ऐसे में चित्रशिला घाट की नियमित सफाई जरूरी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कभी भी कोई गंभीर बीमारी फैल सकती है। नौगाई ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर चित्रशिला घाट के आसपास गौला की सफाई के लिए अलग से बजट उपलब्ध कराने की मांग की है।