सरकार शिक्षा में सुधार के लाख दावे कर ले, लेकिन उसके इन दावों की राजकीय प्राथमिक विद्यालय जस्सागांजा में पोल खुलती है। इस स्कूल की हालत बद से बदतर हो गयी है। प्रधानाध्यापिका पर ऑफिस का ही इतना बोझ है कि उन्हें कक्षाएं पढ़ाने का समय ही नहीं मिलता। इसलिये बच्चे खुद आपस में मिलकर कक्षाओं में अन्य साथियों को पढ़ाते हैं।
रामनगर ब्लाक के जस्सागांजा का राजकीय प्राथमिक विद्यालय सरकारी उपेक्षा का दर्द झेल रहा है। 120 बच्चों का भविष्य लंबे समय से एक प्रधानाध्यापिका चेतना जोशी के हवाले है। पांच कक्षाओं वाले इस स्कूल में न तो बैठने के लिये न चटाई न ही कुर्सी और न ही मेज। बरसात में स्कूल की छत टपकती है तो दीवारों में सीलन आ जाती है।
जिससे बिजली का करंट दीवारों पर दौड़ने लगता है। इतना ही नहीं एक, दो की कक्षाएं और चार, पांच की कक्षाएं एक-एक कमरे में चलती हैं। जिसमें कक्षा पांच के बच्चे चार वालों को और कक्षा दो वाले बच्चे एक वालों को पढ़ाते हैं। कक्षा तीन के बच्चों के लिए अलग कक्ष है। भवन जर्जर हो गया है तो छत का प्लास्टर बच्चों के ऊपर गिरता है। जिससे बच्चों की संख्या में भी गिरावट आने लगी है।
प्रधानाध्यापक चेतना जोशी ने बताया विद्यालय की समस्या के बारे में कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। लेकिन किसी ने विद्यालय की सुध नहीं ली। उन्होंने बताया विद्यालय की खस्ताहाल को देखकर तीन अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम कटवा दिया है। जबकि एक और नाम कटवाने की बात कह रहे हैं।
वहीं उप शिक्षा अधिकारी गौरा बंगारी ने बताया कि इस विद्यालय में तीन शिक्षक हैं। एक सीसीएल में छुट्टी गयी है, जबकि सहायक अध्यापक भी मेडिकल में हैं। उन्होंने बताया क्षेत्र में 25 से अधिक एकल स्कूल हैं। 34 शिक्षा मित्र ट्रेनिंग में गये हुए हैं। एक दो दिन में अध्यापकों की व्यवस्था हो जाएगी। स्कूल भवन जर्जर जरूर है, इसके लिये दैवीय आपदा में पिछले साल भी मरम्मत के लिये पैसा मांगा गया था। मरम्मत के लिए भी अभी तक नहीं मिला है।