नैनीताल। मुस्लिम समुदाय में कामगार बच्चों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को लेकर किए गए एक नवीनतम शोध में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शोध छात्रा अर्शी अंसारी की ओर से किए गए इस अध्ययन में पाया गया है कि इस समुदाय के बच्चों में बाल श्रम की समस्या का मुख्य कारण केवल जागरूकता की कमी नहीं बल्कि गहरे आर्थिक संकट और सामाजिक पिछड़ापन है।
अर्शी अंसारी ने अपने शोध में बच्चों की तीन प्रमुख समस्याओं सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक पर विशेष रूप से प्रकाश डाला है। अध्ययन के अनुसार मुस्लिम समुदाय के भीतर जो परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हैं उनके बच्चों को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए कम उम्र में ही श्रम की ओर रुख करना पड़ता है। यह स्थिति न केवल उनके बचपन को प्रभावित कर रही है बल्कि उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से भी दूर ले जा रही है।
शोध के निष्कर्षों में यह बात स्पष्ट रूप से उभरकर आई है कि बच्चों की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि वे चाहकर भी स्कूल नहीं जा पाते और जो स्कूल जाते हैं स्कूल जाने के साथ-साथ घर की जिम्मेदारी के कारण वह पढ़ाई नहीं कर पाते। काम के बोझ और घर की जिम्मेदारियों के तले दबकर उनका शैक्षणिक विकास पूरी तरह रुक गया है। अर्शी का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो राष्ट्र की प्रगति में इन बच्चों की हिस्सेदारी शून्य हो जाएगी।
कानून बना देना काफी नहीं, सख्ती की जरूरत
इस समस्या के समाधान के लिए शोध में सरकार और प्रशासन को महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। अर्शी ने कहा है कि केवल कानून बना देना काफी नहीं है बल्कि बाल श्रम से जुड़े नियमों में अत्यधिक सख्ती लानी होगी। इसके साथ ही, शोध में यह प्रस्ताव दिया गया है कि सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विशेष रूप से चिह्नित करना चाहिए। इन परिवारों के लिए ऐसे सशक्तिकरण कार्यक्रम और आर्थिक प्रावधान तैयार करने होंगे जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। कहा जब परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तभी बच्चे काम छोड़कर कलम उठा पाएंगे।