हल्द्वानी। बढ़ती ठंड से बच्चों में बाल दमा की शिकायतें बढ़ रही हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल के बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना इसके मरीज पहुंच रहे हैं।
एसटीएच के बाल रोग विभाग की प्रोफेसर रितु रखोलिया ने बताया कि बाल दमा से बच्चों के फेफड़ों में सांस लेने की नली को प्रभावित करती है। इससे सांस लेने वाली नली सूज जाती है तो आसपास की मांसपेशियां अकड़ जाती है। इससे उनको सांस लेना मुश्किल हो जाता है। 150-170 की ओपीडी में प्रतिदिन 25-35 बच्चे बाल दमा के पहुंच रहे। एक से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में यह अधिक देखने को मिल रहा है। सर्दी-जुकाम के मरीजों की रिकवरी जल्दी हो जाती है लेकिन बाल दमा के मरीजों को आराम मिलने में 5-6 दिन का समय लग जाता है।
लक्षण
सांस लेते समय घरघराहट की आवाज आना
बार-बार खांसी का आना
लगातार सांस का फूलना
बचाव के उपाय
बच्चों को धूल मेंं जाने से राकें।
अपने घर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।
मौसम परिवर्तन में बच्चों की सेहत पर ध्यान दें।