श्रम विभाग द्वारा समय - समय पर अभियान चलाने के बावजूद खतरनाक और गैर खतरनाक कार्यों में काम करने वाले बाल श्रमिकों पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। श्रम विभाग के पास बाल श्रमिकों के पुनर्वास की कोई योजना न होने के कारण बाल श्रमिकों को चिह्नित करने का अभियान भी बेअसर रहता है। अब भारत सरकार ने उत्तराखंड के सभी जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना शुरू किए जाने के संबंध में श्रम विभाग से प्रस्ताव मांगा है। विभाग ने परियोजना के संबंध में विस्तृत कार्ययोजना के साथ प्रस्ताव भारत सरकार को भेज दिया है। इस परियोजना को मंजूरी मिलने पर प्रदेेश के सभी 13 जनपदों में बाल श्रम स्कूल खोले जाएंगे। ताकि चिह्नित बाल श्रमिकों को बाल श्रम स्कूल में पुनर्वास के लिए भेजा जा सके।
प्रदेश में ऊधमसिंह नगर के रुद्रपुर, सितारगंज और हरिद्वार में सिडकुल स्थापित किए गए हैं। इन क्षेत्रों के अलावा शहरों में भी खतरनाक और गैर खतरनाक व्यवसायों में बाल श्रमिक काम करते हुए देखे जा सकते हैं। श्रम विभाग द्वारा समय - समय पर अभियान भी चलाया जाता है मगर यह सिर्फ औपचारिक ही रहता है। जो बाल श्रमिक चिह्नित भी होते हैं, उनमें से भी कई बाल श्रमिकों के 14 वर्ष से अधिक आयु के प्रमाणपत्र आने के बाद वे भी मुक्त हो जाते हैं तथा जो शेष बचते हैं उनमें से कई बाल श्रमिक बाद में ढूंढे नहीं मिलते। हालांकि पिछले वर्ष कई बाल श्रमिकों को विभाग ने प्राइमरी स्कूलों में दाखिल भी कराया था।
इधर, बाल श्रमिकों के लिए किए गए कार्यों के आधार पर समाजसेवी कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद से भारत सरकार ने इस दिशा में कई योजना चलाने की तैयारी की है। कुमाऊं परिक्षेत्र के उप श्रमायुक्त अनिल पेटवाल ने बताया कि बाल श्रम पर सख्ती से रोक लगाई जा सके, इसके लिए भारत सरकार ने प्रदेश के सभी 13 जिलों में राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना शुरू करने के संबंध में प्रस्ताव मांगा था जिसे तैयार कर भारत सरकार को भेज दिया गया है। इसके तहत सभी जिलों में बाल श्रमिक स्कूल खोले जाएंगे। उन्होंने बताया कि अभी तक यह बाल श्रम परियोजना केवल देहरादून में चल रही है। इसी तरह यह परियोजना प्रत्येक जिले में शुरू की जानी है। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अभी तक कोई बाल श्रमिक चिह्नित नहीं हुआ है। बाल श्रमिकों को चिह्नित करने के लिए शीघ्र सर्वे किया जाएगा।
--
प्रदेश में 107 चिह्नित हैं बाल श्रमिक
- नैनीताल - 5
- ऊधमसिंह नगर - 53
- देहरादून - 19
- चमोली - 4
- हरिद्वार - 9
- पौढ़ी गढ़वाल - 17
--
अधिकांश में आयु प्रमाणपत्र आने से खत्म हो जाते हैं केस
हल्द्वानी। श्रम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015- 16 में कुमाऊं में 58 और गढ़वाल मंडल में 49 बाल श्रमिक चिह्नित हुए थे। नैनीताल जिले में चिह्नित पांच बाल श्रमिकों में केवल एक प्रकरण में सेवायोजक के खिलाफ कार्यवाही हुई, जबकि एक बाल श्रमिक के संबंध में प्रदत्त आयु प्रमाणपत्र के आधार पर कार्यवाही समाप्त हो गई है। ऊधमसिंह नगर में चिह्नित 53 बाल श्रमिकों में से 49 बाल श्रमिक खतरनाक एवं 4 बाल श्रमिक गैर खतरनाक प्रक्रिया में चिह्नित किए गए थे। 49 बाल श्रमिकों से 23 प्रकरणों में चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर कार्यवाही समाप्त हो गई तथा 15 प्रकरणों में उम्र परीक्षण का मामला फंसा है। देहरादून में 19 बाल श्रमिकों में से 7 प्रकरणों में आयु प्रमाणपत्र आने पर कार्यवाही समाप्त हो गई। बाकी मामलों में कार्यवाही चल रही है।