वन महकमे ने कासनी से शहद बनाना शुरू किया है। किडनी और मधुमेह रोग में कारगर बताई जा रही कासनी से शहद बनाने का प्रयोग प्रदेश में पहली बार करने का दावा वन महकमे ने किया है। विभाग के अनुसार अगर प्रयोग सफल रहा तो इसे वृहद स्तर पर शुरू किया जाएगा।
कासनी की पत्तियां किडनी और मधुमेह रोग में कारगर होती हैं, यह लोगों ने प्रयोग और अनुभव के आधार पर बताया है। वन अनुसंधान नर्सरी में सबसे ज्यादा इसी पौधे की मांग है, इसके लिए लोग दिल्ली, लखनऊ से लेकर दूसरे राज्यों से पहुंच रहे हैं। विभाग का दावा है कि तीस हजार तक पौधों का वितरण किया जा चुका है।
मांग को देखते हुए नर्सरी में व्यापक स्तर पर इसके पौधे तैयार किये जा रहे हैं। अब नर्सरी के पास ही वन विभाग ने कासनी का शहद तैयार करने का ट्रायल शुरू किया है। वन अनुसंधान नर्सरी प्रभारी मदन बिष्ट कहते हैं कि कासनी में फूल आए हैं, इसको मधुमक्खियां बेहद पसंद कर रही हैं।
विभाग ने नर्सरी में शहद एकत्र करने के लिए डिब्बे लगाए हैं, जहां पर मधुमक्खियां शहद को एकत्र कर रही हैं, अभी कुछ डिब्बे हैं, जिनकी संख्या बढ़ाई जा रही है। अगर यह प्रयोग सफल रहा तो वृहद स्तर पर शहद को तैयार किया जाएगा।
शहद में भी वह गुण लोगों को मिल सकेंगे, जो पत्तियों में होते हैं। नर्सरी में एक रजिस्टर भी रखा गया है। इसमें कासनी की पत्तियों को खाने से बीमारी में क्या फायदा हुआ है? उम्र, रोग समेत अनुभव को दर्ज भी किया जा रहा है।