छठ पर्व के अवसर पर हल्द्वानी में पूजा अर्चना करती महिलाएं। विज्ञप्ति
हल्द्वानी। छह महापर्व के दूसरे दिन सुशीला तिवारी घाट पर वेदी पूजा हुई। इसे खरना पूजा भी कहा जाता है। महिलाओं ने सुबह स्नान के बाद दिनभर व्रत रखा। शाम को मीठा भोजन करने के बाद 36 घंटे के निर्जल व्रत शुरू किया। निर्जल व्रत कल सोमवार उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूरा होगा। इसमें साफ-सफाई इत्यादि का विशेष ध्यान रखा जाता है।
छठ पूजा सेवा समिति के महामंत्री मुरारी प्रसाद ने बताया कि छठ पर्व के दूसरे दिन एसटीएच के समीप बने छठ पूजा स्थल पर वेदी की पूजा की गई। महिलाओं ने देवी के सम्मुख दीया जलाया। व्रती महिलाओं ने शाम को सूर्य डूबने के बाद मीठा भोजन किया। इसे खरना कहा जाता है। इसके बाद 36 घंटे तक रखे जाने वाले निर्जल व्रत की शुरुआत हुई।
समिति पदाधिकारियों ने कहा कि एक बार भगवान बजरंगबली ने बाल रूप में सूर्य भगवान को फल समझकर खा निगल लिया था। तब चारों ओर अंधेरा छा गया था। सभी प्रणी भयभीत हो गए थे। भगवान भी इस घटना से चिंतित थे। सभी लोगों ने बजरंगबली की प्रार्थना की। प्रार्थना स्वीकार करने के बाद बजरंगबली ने अपना मुंह खोला। इसके बाद पृथ्वी पर उजाला छाया। उसी दिन से डूबते हुए सूर्य और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह पर्व परिवार की सुख समृद्धि के लिए भी मनाया जाता है। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष कृष्ण शाह, उपाध्यक्ष शंकर भगत, सचिव सुरेश भगत आदि मौजूद रहे।