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Nainital News: कुमाऊंनी शब्दों की मिठास को डिजिटली किया कैद

Sat, 04 Jul 2026 01:17 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
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नैनीताल। विश्वविद्यालय की विलुप्त होते कुमाऊंनी शब्दों को डिजिटल आर्काइव में सुरक्षित रखने की पहल तीसरे दिन पूरी हुई। इस दौरान 1956 शब्दों का मेटा डाटा निर्माण व रिकॉर्डिंग की गई। इनमें वो शब्द शामिल हैं जो अब कुमाऊं के लोगों की जुबां से ही गायब हो रहे हैं जैसे लुकुड़ जिसका हिंदी अर्थ कपड़ा होता है और हतकान यानी गहने, दिसाण यानी बिस्तर।
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शुक्रवार को कुमाऊं विश्वविद्यालय के हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषा विभाग और आईक्यूएसी की ओर से आयोजित कुमाऊंनी का बोलता शब्दकोश'''' राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न हुई। यह त्रिदिवसीय कार्यशाला यूजीसी एमएमटीटीसी, नैनीताल में आयोजित की गई थी। कार्यशाला के दौरान लगभग 1956 कुमाऊंनी शब्दों की रिकॉर्डिंग की जा चुकी है। इसका उद्देश्य कुमाऊंनी भाषा को संरक्षित करना है। रिकॉर्डिंग के प्रारूप का प्रस्तुतीकरण कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति व संरक्षक प्रो. (कर्नल) दीवान सिंह रावत के समक्ष यूजीसी एमएमटीटीसी विश्वविद्यालय के देवदार सभागार में किया गया। इसमें सोर्याली एवं खसपर्जिया बोली के शब्दों की व्याकरणिक कोटि को दर्शाते हुए उनके हिंदी और अंग्रेजी अर्थ के साथ-साथ साउंड रिकॉर्डिंग फाइल दर्शायी गई। अंत में कार्यशाला संयोजक प्रो. चंद्रकला रावत ने सभी का आभार व धन्यवाद किया। इस अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह राणा, प्रो कविता रस्तोगी, डॉ उमा भट्ट, प्रो चंद्रकला रावत, डॉ विष्णु कुमार सिंह, सुनीता भास्कर, डॉ सुमेधा शुक्ला, रूबी सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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