विधानसभा चुनाव में कौन प्रत्याशी कितना खर्चा कर रहा है, इस पर निर्वाचन आयोग की पैनी नजर लगी हुई है। नामांकन जुलूस से लेकर विभिन्न गतिविधियों में प्रत्याशियों का कितना धन खर्च हो रहा है, सहायक व्यय प्रेक्षकों ने वीडियो रिकार्डिंग के आधार पर उनके खर्च का हिसाब दर्ज करना शुरू कर दिया है।
प्रत्याशी के संबंध में जो भी चुनाव प्रचार सामग्री या दूसरे प्रचार कार्यों पर खर्चा होगा, वह सब प्रत्याशी के खाते में जोड़ा जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने विधानसभा प्रत्याशियों के चुनाव खर्च के लिए 28 लाख रुपए सीमा निर्धारित की है। कोई भी प्रत्याशी इससे अधिक धनराशि चुनाव प्रचार पर खर्च नहीं कर पाएगा।
इस पर नजर रखने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने दो वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों अजय मलिक और नरेश बंसल को जिले में व्यय प्रेक्षक के रूप में तैनात किया है। इनके निर्देशन में प्रत्येक विधानसभा स्तर पर छह - छह सहायक व्यय प्रेक्षक काम कर रहे हैं।
ये सभी केंद्रीय विभागों के अधिकारी और कर्मचारी हैं। इसके अलावा प्रत्याशियों के खर्चे को जोड़ने के लिए बनी टीम एवं विभिन्न कार्य देखने के लिए जिले के मुख्य कोषाधिकारी नरेंद्र कुमार नोडल अधिकारी व्यय के रूप में कार्य कर रहे हैं।
इसी तरह प्रत्येक विधानसभा स्तर पर तीन - तीन फ्लाइंग स्क्वायड टीमों के अतिरिक्त वीडियोग्राफी टीमें भी लगी हैं जो प्रत्याशियों के खर्चे पर नजर रखे हुए हैं। उपजिला निर्वाचन अधिकारी जसवंत सिंह राठौर ने बताया कि नामांकन करने के साथ ही प्रत्याशियों के चुनावी खर्चे का मीटर शुरू हो गया है।
नामांकन जुलूस या फिर सभा में जो - जो सामान का इस्तेमाल किया गया, उसका खर्चा निर्धारित अनुमानित रेटों के आधार पर रजिस्टर में दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्याशियों के कार्यक्रमों की वीडियो रिकार्डिंग करने वाली टीम सहायक व्यय प्रेक्षकों को रिकार्डिंग सीडी दे रही है, जिसके आधार पर खर्चा जोड़ा जा रहा है।
प्रत्याशी सभा में जितनी कुर्सियां या टोपियां, झंडे, बैनर या फिर स्टीकर का इस्तेमाल करेगा उसका हिसाब सहायक व्यय प्रेक्षक रख रहे हैं। प्रत्याशी भी अपने पास इसका हिसाब रखेंगे।