नगर निगम की दुकानों का किराया प्रति वर्ग फीट होने से व्यापारियों की लामबंदी के बाद अब नगर निगम कर्मचारी संगठन भी निगम प्रशासन के समर्थन में खुलकर उतर आया है। शनिवार को व्यापारियों और नगर निगम कर्मचारियों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। दोनों तरफ से नारेबाजी और धक्का मुक्की होने से निगम दफ्तर में करीब डेढ़ घंटे हंगामा और अफरा तफरी का माहौल रहा।
नगर निगम की 1176 आवंटित दुकानों से सालाना 57 लाख रुपए राजस्व मिलता है। निगम बोर्ड ने दुकानों का किराया अब प्रति वर्ग फीट प्रति माह निर्धारित कर दिया है। आवंटित दुकानों को लोकेशन के हिसाब से चार श्रेणियों में बांटा गया है। इससे व्यापारी भड़क गए हैं। विरोध में व्यापारी संगठन नगर आयुक्त और मेयर को ज्ञापन सौंप चुके हैं।
शनिवार सुबह भी प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष योगेश शर्मा और पार्षद महेंद्र नागर के नेतृत्व में व्यापारी नगर निगम दफ्तर पहुंचे। व्यापारियों ने निगम कार्यालय के प्रांगण में नई व्यवस्था खत्म करने की मांग की। व्यापारियों ने निगम कर्मचारी चोर और भ्रष्टाचारी हैं की नारेबाजी शुरू कर दी।
ससे निगम कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। अधिकांश अनुभागों के कर्मचारी नगर निगम स्वच्छकार महासंघ अध्यक्ष राम अवतार राजौर, नगर निगम इंप्लाइज यूनियन अध्यक्ष रितेश बेलवाल और नगर निगम कर्मचारी महासंघ के नरेश परमार के नेतृत्व में बाहर आ गए। कर्मचारियों ने भी दुकान आवंटन रद्द करो के नारे लगाने शुरू कर दिए। कार्यालय प्रांगण में कर्मचारियों और व्यापारियों के आमने सामने होने से तनाव की स्थिति हो गई।
नोकझोंक और धक्का मुक्की से हंगामा शुरू हो गया।
कर्मचारियों ने कहा कि दशकों से दुकान किराया वृद्धि नहीं हुई है। आवंटित दुकानों का किराया निजी दुकानों की तुलना में काफी कम है। जबकि व्यापारी नेताओं ने कहा कि उनका विरोध किराया वृद्धि नहीं बल्कि प्रति वर्ग फीट निर्धारण से है। करीब डेढ़ घंटा हंगामे के बाद व्यापारियों के लौटने के बाद कर्मचारी भी अपने कामकाज में लौटे।