सरकारी हीलाहवाली और विभाग की सुस्ती लोगों पर भारी पड़ रही है। पांच वर्ष पूर्व बन कर तैयार रामनगर का ब्लड बैंक शुरू नहीं हो सका। ब्लड बैंक को स्टाफ और उपकरण का इंतजार है। स्टाफ की नियुक्ति संबंधी फाइल स्वास्थ्य महानिदेशालय में धूल फांक रही है।
वर्ष 2011 में करीब 15 लाख रुपये की लागत से रामनगर में ब्लड बैंक बनकर तैयार हो गया था। स्टाफ न होने के कारण ब्लड बैंक शुरू नहीं हो सका है। ब्लड बैंक के लिए एक ब्लड बैंक इंचार्ज, दो लैब तकनीशियन, एक स्टाफ नर्स, एक लैब अटेंडेंट और आउट सोर्स से सफाई/चौकीदार की जरूरत है।
वर्ष 2014 में स्वास्थ्य महानिदेशालय में इसका प्रस्ताव भेजा गया था। तीन वर्ष बीतने के बाद भी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। जबकि एड्स कंट्रोल सोसायटी के पास उपकरण की फाइल लंबित पड़ी है। सोसायटी से लगभग 50 लाख रुपये के उपकरण आने हैं। सीएमएस डॉ. एचएस खड़ायत ने बताया कि जिलाधिकारी ने चार लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। चार लाख रुपये से फर्नीचर और उपकरण खरीदे जाएंगे।