नैनीताल जिले में बसपा ने अपना वोट बैंक बढ़ाने के लिए सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। इसी फार्मूले के तहत बसपा ने विधानसभा सीटों पर टिकटों का वितरण किया है। ब्राह्मण, ठाकुर, मुस्लिम, दलित और वैश्य सभी जातियों को साधने के लिए प्रत्याशी मैदान में उतारे गए हैं।
ये प्रत्याशी एक-दूसरे की विधानसभा सीटों पर मदद करने का काम भी करेंगे। बसपा ने उत्तराखंड में पार्टी का ग्राफ बढ़ाने के लिए यूपी की तर्ज पर सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले पर काम करना शुरू कर दिया है।
नैनीताल जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच सीटों पर जो प्रत्याशी उतारे गए हैं उनमें जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है, चुनाव में प्रभावित करने वाले सभी वर्गों को बसपा ने पार्टी से जोड़ने की कोशिश की है।
प्रदेश की हॉट सीट मानी जाने वाली हल्द्वानी विधानसभा सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका में हैं इसलिए बसपा ने इस सीट से मुस्लिम समाज और खासकर बनभूलपुरा क्षेत्र के पास किदवई नगर में जीवन बिताने वाले शकील अहमद केके को प्रत्याशी बनाकर दांव खेला है।
उसी तरह वर्ष 2002 में पहले विधानसभा चुनाव में नैनीताल सीट से बसपा के सिंबल पर चुनाव लड़ चुके डॉ. भूपाल सिंह भाकुनी के बेटे वरुण प्रताप सिंह भाकुनी को कालाढूंगी विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है।
डॉ. भाकुनी ने अपने दमखम पर 7499 वोट हासिल कर वोट बैंक बढ़ाने का काम किया था। डॉ. भाकुनी नैनीताल रोड पर रहते हैं और बेटे वरुण को चुनाव मैदान में कालाढूंगी सीट से उतारा है, जिसकी वजह इस सीट पर क्षत्रिय बिरादरी का वोट निर्णायक भूमिका में होना माना जा रहा है।
रामनगर विधानसभा सीट से राजीव अग्रवाल, भीमताल सीट से तारा दत्त पांडे और लालकुआं सीट से राजीव बिरखानी को भी जातीय समीकरण के आधार पर मैदान में उतारा गया है। नैनीताल विधानसभा सीट से अभी प्रत्याशी की घोषणा होनी बाकी है।
बता दें कि वर्ष 2002 में प्रदेश में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ते हुए बसपा ने 68 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए थे और 3,12,842 वोट हासिल किए थे।