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हल्द्वानी में भी ब्रेड की जांच शुरू

Sun, 05 Jun 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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ब्रेड की सैंपलिंग - फोटो : अमर उजाला
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 ब्रेड में मिलाये जाने वाले पोटेशियम ब्रोमेट को लेकर खाद्य विभाग ने हल्द्वानी में ब्रेड के विभिन्न ब्रांडों के नमूने लेकर जांच शुरू कर दी है। बाहर से आने वाले दूध का भी मौके पर परीक्षण किया गया। खाद्य अधिकारियों ने दूध के नमूनों में किसी तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। ब्रेड की स्थिति का अंदाजा नमूनों की जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी। 
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 ब्रेड और दूध का हर घर में उपयोग होता है। ऐसे में मौके-बेमौके दूध में मिलावट की शिकायत के मामले भी उठते रहते हैं। बेकरी उत्पाद ब्रेड, बन, केक आदि में मैदे को फुलाने के लिए पोटेशियम ब्रोमेट मिलाया जाता है। खाद्य अधिकारियों के मुताबिक 23 मई को सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने रिपोर्ट जारी कर ब्रेड और बेकरी उत्पादों में पोटेशियम ब्रोमेट की जरूरत से अधिक मात्रा होने का दावा किया था। सीएसई का कहना था कि पोटेशियम ब्रोमेट से कैंसर की आशंका रहती है। इसके बाद दिल्ली में फूड एंड ड्रग अॅथारिटी (एफडीए) ने दिल्ली में सात सैंपल लिये थे। इनमें से किसी में भी पोटेशियम ब्रोमेट नहीं मिला था।

नैनीताल जनपद में भी शनिवार को हल्द्वानी में खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश टम्टा ने मुखानी स्थित रोज मॉल से ब्रिटेनिया और मिस्टर पेपर ब्रेड के सैंपल लिए। टम्टा के अनुसार नमूनों को जांच के लिए लैब में भेजा गया है। इसके साथ ही नया गांव के पास बस, पिकप और बाइक से आने वाले दूध की स्पॉट जांच भी की गई। टम्टा के अनुसार स्पॉट टेस्ट में केमिकल से दूध में यूरिया, डिटर्जेंट, सोडा, स्टार्च आदि की जांच की जाती है। करीब दस वाहनों में दूध की जांच की गई लेकिन किसी में भी इस तरह के केमिकल नहीं मिले। खाद्य विभाग ने फिलहाल इस अभियान को जारी रखने का फैसला किया है।
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अब पोटेशियम ब्रोमेट पर प्रतिबंध की भी है तैयारी 
हल्द्वानी। भारत में पोटेशियम ब्रोमेट  पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन उत्पादों में इसकी मात्रा तय की गयी है। ब्रेड बनाने के लिए एक किलो मैदे में 50 मिलीग्राम पोटेशियम ब्रोमेट और पाव, बन, पिज्जा आदि में किलो में 20 मिलीग्राम पोटेशियम ब्रोमेट मिलाने का मानक है। पोटेशियम ब्रोमेट मैदे को फुलाने का काम करता है और कीमत भी कम है। सीएसई की रिपोर्ट के बाद अब इसे प्रतिबंधित करने की तैयारी चल रही है। 

खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर भी सवाल
हल्द्वानी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर मामला इतना भी संतोषजनक नहीं है। नमूनों की जांच को लेकर होने वाली देरी के कारण कई बार मामले दबे रह जा रहे हैं। जिला खाद्य सुरक्षा विभाग ने वर्ष 2015 -16 में विभिन्न खाद्य पदार्थों के 131 नमूने लिए थे। इसमें से अब तक विभाग को जांच लैब से 78 नमूनों की ही रिपोर्ट मिली है। 20 नमूनों की रिपोर्ट फेल पाई गई है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीरेंद्र सिंह बिष्ट के अनुसार फेल हुए नमूनों में से चार ने रैफलर लैब में सैंपल जांच की अपील की है। 12 के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज किया गया है। 
अब तक के फेल नमूनों का प्रतिशत देखें तो यह करीब 25 प्रतिशत है। जाहिर है कि गुणवत्ता के मानक पर खरे न उतरने वाले खाद्य पदार्थ भी खासी मात्रा में लोगों तक पहुंच बना रहे हैं। विभाग के स्तर पर वैसे 131 नमूने लिए गए हैं और इसमें से मात्र 78 की ही रिपोर्ट मिली है। अभी 53 नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक पूरे राज्य के सैंपल की जांच के लिए रुद्रपुर में प्रयोगशाला है। मुसीबत यह है कि इस प्रयोगशाला में तकनीकी रूप से दक्ष कार्मिक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में जांच का काम भी प्रभावित हो रहा है। इसके चलते कई मामलों की रिपोर्ट लंबे समय तक नहीं मिलती।  
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